बिलासपुर। बिलासपुर एयरपोर्ट से जुड़ी यात्री सुविधाओं और हवाई विस्तार के मामलों में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। टर्मिनल भवन के बाहर प्रस्तावित कैंटीन, टॉयलेट और यात्रियों के विश्रामगृह का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में प्रारंभ न होने पर हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है।
यह मामला गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति राधाकृष्ण अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष बिलासपुर एयरपोर्ट एवं हवाई सुविधा विस्तार से संबंधित जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने अदालत को बताया कि राज्य शासन ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए 290 एकड़ भूमि के बदले 50 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि जमा कर दी है। अब केवल भूमि वापसी की औपचारिक प्रक्रिया शेष है। इस पर खंडपीठ ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इससे बिलासपुर एयरपोर्ट को 4-सी श्रेणी में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
खंडपीठ को यह भी अवगत कराया गया कि मुख्य सचिव द्वारा दाखिल शपथ पत्र के अनुसार एयरपोर्ट पर डीवीओआर मशीन और नाइट लैंडिंग लाइटिंग सिस्टम का कमीशनिंग कार्य पूर्ण हो चुका है। साथ ही डीजीसीए से नाइट लैंडिंग लाइसेंस के लिए आवेदन भी प्रस्तुत किया जा चुका है। अब केवल डीजीसीए के निरीक्षण और लाइसेंस जारी होने की औपचारिकता शेष है।
शपथ पत्र में वायबिलिटी गैप फंडिंग और यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, टर्मिनल के बाहर यात्री सुविधाओं से जुड़े कार्यों में देरी को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव से स्पष्ट जवाब मांगा है।
