वेनेजुएला में जारी राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच भारत की ओर से पहली बार खुलकर और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारत का रुख दुनिया के सामने रखा है।
लग्ज़मबर्ग दौरे पर मौजूद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा, “वहां जो कुछ भी हुआ है, वह किसी के लिए भी चिंता का विषय है।”
संवाद से समाधान की अपील
विदेश मंत्री ने सभी पक्षों से संवाद और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी निर्णय या प्रक्रिया में वेनेजुएला के आम नागरिकों की सुरक्षा और भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जयशंकर का संदेश साफ था कि राजनीतिक खींचतान का खामियाजा जनता को नहीं भुगतना चाहिए।
भारत-वेनेजुएला के पुराने संबंधों का उल्लेख
विदेश मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि भारत और वेनेजुएला के बीच वर्षों से मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। इसी कारण भारत चाहता है कि वेनेजुएला में हालात और न बिगड़ें तथा वहां के नागरिक सुरक्षित रहें।
यूरोप की धरती से भारत का स्पष्ट संदेश
यह बयान लग्ज़मबर्ग के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बैटल के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद सामने आया। यूरोप की धरती से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह किसी एक पक्ष के समर्थन में नहीं, बल्कि शांति, स्थिरता और संवाद के पक्ष में खड़ा है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता
इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी वेनेजुएला के हालात को लेकर बयान जारी किया था। मंत्रालय ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए भारतीय दूतावास को अलर्ट मोड पर रखा है। साथ ही भारतीय नागरिकों से फिलहाल वेनेजुएला की यात्रा न करने की अपील की गई है और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
वैश्विक राजनीति में बढ़ी हलचल
अमेरिका की कार्रवाई, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़े घटनाक्रम और अचानक बिगड़े हालातों के कारण वेनेजुएला संकट ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ऐसे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान यह दर्शाता है कि भारत इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और मानवीय दृष्टिकोण के साथ शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन कर रहा है।
