Deepavali included UNESCO list : नई दिल्ली। भारत के सबसे बड़े और प्रिय उत्सव दीपावली को बुधवार को यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage of Humanity) की सूची में शामिल कर लिया। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में चल रहे यूनेस्को की अंतरसरकारी समिति के 20वें सत्र में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। जैसे ही घोषणा हुई, पूरे हॉल में “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” के नारे गूंज उठे। अब दीपावली योग, गरबा, कुंभ मेला, दुर्गा पूजा और रामलीला की तरह यूनेस्को की इस सूची में भारत की 16वीं प्रविष्टि बन गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत X पर अपनी खुशी जाहिर की और लिखा, “भारत और दुनिया भर के लोग रोमांचित हैं। दीपावली हमारी संस्कृति और लोकाचार से गहराई से जुड़ी है यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह प्रकाश और धर्म की जीत का प्रतीक है। यूनेस्को की सूची में शामिल होने से दीपावली की वैश्विक लोकप्रियता और बढ़ेगी। प्रभु श्रीराम के आदर्श हमें अनंत काल तक मार्गदर्शन देते रहें।” केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसे “शांति और अच्छाई की जीत की शाश्वत मानवीय अभिलाषा का सम्मान” बताया और कहा कि यह टैग एक जिम्मेदारी भी है हमें सुनिश्चित करना होगा कि आने वाली पीढ़ियां भी दीपावली को उसी भाव और उत्साह से मनाएं।

यह पहला मौका है जब भारत यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण समिति के सत्र की मेजबानी कर रहा है। 8 से 13 दिसंबर तक लाल किले में चल रहे इस सत्र में 180 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। दीपावली को सूची में शामिल करने के लिए भारत ने 2024 में ही नामांकन दाखिल किया था, जिसमें त्योहार की समावेशी भावना, पर्यावरण जागरूकता (ग्रीन दीवाली) और सामुदायिक एकता पर जोर दिया गया था। अब दीपावली दुनिया की उन चुनिंदा सांस्कृतिक परंपराओं में शुमार हो गई है, जो मानवता की साझी धरोहर मानी जाती हैं। भारत के लिए यह गर्व का क्षण है प्रकाश का पर्व अब पूरी दुनिया का प्रकाश बन गया है।
