India Mysterious Temple List: भारत, अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हजारों मंदिर हैं, जिनमें कुछ ऐसे भी हैं जो रहस्यमयी और अनोखी परंपराओं के लिए जाने जाते हैं। ऐसे ही कुछ मंदिरों में भक्तों के लिए प्रसाद ग्रहण करना या घर ले जाना वर्जित माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 मंदिरों के बारे में, जहाँ प्रसाद केवल प्रतीकात्मक रूप से ही ग्रहण किया जाता है।
1. मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी मंदिर को नकारात्मक ऊर्जाओं और बुरी शक्तियों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। यहाँ भगवान बालाजी को बूंदी के लड्डू और भैरव बाबा को उड़द–चावल का भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि प्रसाद खाना या घर ले जाना अशुभ है, क्योंकि इससे नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति पर पड़ सकता है।

2. नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश स्थित नैना देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ माता नैना देवी को फल, फूल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। प्रसाद ग्रहण केवल मंदिर परिसर के भीतर ही शुभ माना जाता है। इसे घर ले जाना परंपराओं के विरुद्ध और अशुभ माना जाता है।

3. काल भैरव मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश
उज्जैन के काल भैरव मंदिर में भगवान काल भैरव को शराब का प्रसाद अर्पित किया जाता है। यह प्रसाद केवल भगवान के लिए होता है और इसे ग्रहण करना या घर ले जाना वर्जित है। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में संकट और अशुभ घटनाएं बढ़ सकती हैं।

4. मां कामाख्या देवी मंदिर, असम
असम के गुवाहाटी में स्थित मां कामाख्या देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। मासिक धर्म के दौरान मंदिर तीन दिनों के लिए बंद रहता है और इस दौरान प्रसाद ग्रहण करना वर्जित है। भक्तों को इस अवधि में मंदिर में प्रवेश की अनुमति भी नहीं होती।

5. कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर में एक करोड़ शिवलिंग हैं। यहाँ पूजा के बाद मिलने वाला प्रसाद केवल प्रतीकात्मक रूप से ग्रहण किया जाता है। प्रसाद को खाने या घर ले जाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह प्रसाद चंडेश्वर को समर्पित होता है।

इन मंदिरों में प्रसाद केवल भगवान को अर्पित करने के लिए होता है और भक्तों को इसे ग्रहण करने की मनाही होती है। यह परंपरा उनके धार्मिक विश्वास और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में मानी जाती है।
