Amit Shah In Lok Sabha: नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बिलों पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि इसके क्रियान्वयन का विरोध कर रहा है।
अमित शाह का बड़ा बयान
अमित शाह ने कहा कि परिसीमन का विरोध वास्तव में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की बढ़ रही सीटों का विरोध है। उन्होंने सदन को बताया कि देश में 127 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां 20 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। कहीं 45 लाख वोटरों का एक प्रतिनिधि है तो कहीं मात्र 6 लाख वोटरों का। इससे “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन हो रहा है।
कांग्रेस पर निशाना
गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने 50 साल तक देश को उचित प्रतिनिधित्व से वंचित रखा। उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 1971 में उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया को रोक दिया था। अब जब सरकार इसे लागू करने जा रही है तो विपक्ष विरोध कर रहा है।
तीन बिलों का मकसद स्पष्ट किया
अमित शाह ने तीनों बिलों का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा:
- पहला: नारी शक्ति वंदन अधिनियम को समय पर लागू करना ताकि 2029 के लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ हों।
- दूसरा: संविधान की मूल भावना “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” को लागू करना।
- तीसरा: SC/ST की बढ़ती आबादी के अनुपात में उनकी सीटें बढ़ाना।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में 2026 की जनगणना के बाद परिसीमन का प्रावधान पहले से ही लिखा हुआ है।
तीखी राजनीतिक बहस
विपक्ष ने ओबीसी आरक्षण और दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जताई तथा बिल का विरोध करने का ऐलान किया। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि डिलिमिटेशन में SC/ST के लिए उनकी आबादी के हिसाब से सीटें बढ़ाई जाएंगी, इसलिए इसका विरोध करना वास्तव में SC/ST के हितों के खिलाफ है।
बहस के दौरान 56 महिला सांसदों ने हिस्सा लिया। सरकार उम्मीद जता रही है कि दिन के अंत तक इन तीनों बिलों पर वोटिंग हो जाएगी।
यह चर्चा महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में चल रही तीखी राजनीतिक बहस को और गहरा बना रही है।
