विकसित भारत जीरामजी योजना के तहत ग्रामीण परिसंपत्तियों की पारदर्शी निगरानी और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए चलाए जा रहे ‘भूग्राम’ (स्टेज-III) अभियान में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। राज्य में अब तक 99.34 प्रतिशत ग्रामीण परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग पूरी हो चुकी है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की 24 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कुल 11,90,327 निर्मित परिसंपत्तियों में से 11,82,480 परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग पूरी कर ली गई है। इसके मुकाबले राष्ट्रीय स्तर पर 3,23,91,318 परिसंपत्तियों में से 3,01,49,345 परिसंपत्तियां जियो-टैग की जा चुकी हैं, जो कुल 93.08 प्रतिशत है।
दूरस्थ इलाकों में चुनौती के बावजूद पूरा हुआ काम
छत्तीसगढ़ में जियो-टैगिंग का काम खासतौर पर बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरस्थ वनांचलों, पहाड़ी क्षेत्रों और सीमित नेटवर्क कनेक्टिविटी वाले इलाकों में चुनौतीपूर्ण रहा। इन परिस्थितियों के बावजूद मैदानी कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और तकनीकी अमले के समन्वित प्रयासों से जियो-टैगिंग का काम तेजी से पूरा किया गया।
GIS मैपिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता
‘भूग्राम’ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित परिसंपत्तियों को जीआईएस मैप पर दर्ज किया जा रहा है। इससे विकास कार्यों की डिजिटल निगरानी के साथ उनकी लोकेशन और स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। योजना के तहत रियल-टाइम मॉनिटरिंग को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होने की उम्मीद है।
