तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर दोबारा हमला किया गया तो संघर्ष का दायरा हिंद महासागर तक फैल सकता है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, सफवी ने कहा कि मौजूदा टकराव फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर तक पहुंच चुका है और आगे हिंद महासागर भी इसकी चपेट में आ सकता है।
अमेरिकी कार्रवाई की स्थिति में जवाबी हमले की चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी अधिकारियों ने किसी नई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में अमेरिकी हितों और संपत्तियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी संकेत दिया है कि आगे किसी उकसावे की स्थिति में उसकी सैन्य रणनीति और लक्ष्यों में बदलाव हो सकता है।
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटी
तनाव का असर प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सप्ताहांत में होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल 17 कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि पिछले सप्ताह यह संख्या 37 थी। संघर्ष से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन करीब 125 जहाजों की आवाजाही होती थी। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी कमी की बात सामने आई है।
भारत के लिए क्यों अहम है हिंद महासागर?
हिंद महासागर एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यदि संघर्ष का विस्तार इस क्षेत्र तक होता है, तो जहाजों की आवाजाही, समुद्री बीमा लागत, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों और व्यापार का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया तथा समुद्री मार्गों से जुड़ा है। लंबे समय तक समुद्री मार्गों में व्यवधान होने पर तेल-गैस की आपूर्ति, परिवहन लागत और क्षेत्रीय व्यापार पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी।
