रायपुर, 15 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय तक ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है, लेकिन अब प्रदेश की विकास यात्रा में कृषि के साथ उद्योग, तकनीक के साथ कौशल और रोजगार के साथ उद्यमिता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिए गए हालिया निर्णयों में युवाओं के कौशल विकास और अनुभवी मानव संसाधन को नए अवसर देने पर जोर दिखाई देता है।
नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना से युवाओं को आधुनिक और रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण का नया मंच मिलेगा। वहीं, विभिन्न शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने से अनुभव और कार्यकुशलता को भी अवसर का दायरा मिलेगा।
डिग्री के साथ हुनर पर जोर
आज के दौर में केवल शैक्षणिक डिग्री ही पर्याप्त नहीं मानी जाती। उद्योगों की बदलती जरूरतों के बीच व्यावहारिक प्रशिक्षण और तकनीकी कौशल का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्राम तेंदुवा में NSTI की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों में हर वर्ष करीब एक हजार और अल्पकालीन कार्यक्रमों में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी।
कौशल से रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह
NSTI के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण के साथ बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने का अवसर मिलेगा। कौशल केवल नौकरी हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का साधन भी बन सकता है।
प्रशिक्षित युवा रोजगार तलाशने के साथ अपना उद्यम शुरू कर रोजगार देने वाला भी बन सकता है। गांवों और कस्बों के युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण मिलने से स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
45 वर्ष की आयु सीमा से अनुभव को मिलेगा अवसर
अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष करने का निर्णय उन लोगों के लिए नए अवसर खोलता है, जिनके पास वर्षों का कार्य अनुभव, व्यावहारिक ज्ञान और कार्यकुशलता है। लंबे समय तक किसी व्यवस्था में काम करने वाले लोगों ने प्रक्रियाओं, चुनौतियों और जिम्मेदारियों को करीब से समझा होता है। ऐसे अनुभव का उपयोग नई जिम्मेदारियों में किया जाना संस्थागत क्षमता को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच का संगम
प्रदेश के विकास में युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच दोनों की अपनी भूमिका है। युवा नई तकनीक और नए विचार लेकर आते हैं, जबकि अनुभवी वर्ग परिस्थितियों से निपटने की व्यावहारिक समझ प्रदान करता है। NSTI युवाओं के हुनर को मंच देने की दिशा में कदम है, तो आयु सीमा में वृद्धि अनुभवी वर्ग की क्षमता को नए अवसरों से जोड़ने का प्रयास है।
छत्तीसगढ़ का भविष्य केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां के लोगों की क्षमता, कौशल और अनुभव से भी तय होगा। जब हुनर को मंच, अनुभव को अवसर और सपनों को सही दिशा मिलेगी, तो विकास का असर लोगों के जीवन में दिखाई देगा। कौशल से रोजगार, अनुभव से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरता की यह सोच प्रदेश के विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
