छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि संभावित खतरे को देखते हुए प्रदेश में हर स्तर पर तैयारियां कर ली गई हैं और स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के मामले सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं। दुर्ग जिले में विदेश यात्रा से लौटे तीन लोगों को 21 दिनों के लिए आइसोलेशन में रखा गया है। इनमें कांगो, इथियोपिया और एक अन्य अफ्रीकी देश से जुड़े नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा सूडान से लौटे एक व्यक्ति को भी होम आइसोलेशन में रखा गया है। इस तरह वर्तमान में कुल चार लोगों की निगरानी की जा रही है।
मंत्री के अनुसार, अब तक इनमें से किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं। जांच के दौरान किसी प्रकार के संदिग्ध संकेत सामने नहीं आए हैं, फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से सभी को निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रख रही हैं।
इबोला वायरस एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो शरीर की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू की तरह दिखाई देते हैं, जिनमें बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और शरीर में दर्द शामिल हैं। गंभीर स्थिति में रक्तस्राव, तंत्रिका संबंधी समस्याएं और उल्टी जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस संक्रमित जानवरों, विशेष रूप से चमगादड़ों और कुछ वन्य जीवों के संपर्क से इंसानों में फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने, मल-मूत्र या अन्य शारीरिक द्रवों के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रदेश में निगरानी, जांच और आइसोलेशन की सभी व्यवस्थाएं सक्रिय हैं तथा किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह तैयार है।
