Digital Census in India : नई दिल्ली। भारत 2027 में अपनी 16वीं जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से करने जा रहा है यह देश के इतिहास में पहली बार होगा। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में इसकी आधिकारिक पुष्टि की। कोविड, चुनाव और प्रशासनिक देरी के चलते 2021 से टलती आ रही जनगणना अब दो चरणों में होगी: पहला चरण (अप्रैल-सितंबर 2026) में घरों की लिस्टिंग और मैपिंग, दूसरा चरण (फरवरी-मार्च 2027) में जनसंख्या गणना। बर्फीले इलाकों के लिए अलग व्यवस्था होगी। गणनाकर्मी कागज-कलम की जगह अपने स्मार्टफोन पर ऐप के जरिए डेटा भरेंगे, और आम लोग भी वेब पोर्टल पर सेल्फ-एनुमरेशन कर सकेंगे। ऐप 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा।
इस बार सबसे बड़ा बदलाव जाति गणना का है स्वतंत्र भारत में पहली बार एससी/एसटी के अलावा अन्य जातियों का भी आधिकारिक डेटा एकत्र होगा। डिजिटल प्रक्रिया के फायदे जबरदस्त हैं: 2011 में अंतिम आंकड़े आने में सालों लगे थे, अब प्रारंभिक डेटा 10 दिन और पूरा डेटा 6-9 महीने में मिल जाएगा। इससे 2029 के परिसीमन, फंड आवंटन और योजनाओं की सटीक प्लानिंग में मदद मिलेगी। गणनाकर्मी अपने फोन इस्तेमाल करेंगे, इसलिए लाखों टैबलेट खरीदने की जरूरत नहीं लागत भी बचेगी।

हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं। देश की 35% आबादी अभी ऑफलाइन है, खासकर पूर्वोत्तर, हिमालयी क्षेत्र और दूरदराज के गांवों में इंटरनेट की समस्या रहेगी। 30 लाख से ज्यादा गणनाकर्मियों को नई तकनीक का गहन ट्रेनिंग देना पड़ेगा। सबसे बड़ी चिंता डेटा सिक्योरिटी की है निजी फोन पर जाति, प्रवास, संपत्ति जैसी संवेदनशील जानकारी स्टोर होगी, इसलिए साइबर हमले और डेटा लीक का खतरा बना रहेगा। सरकार ने एन्क्रिप्शन और सिक्योर ऐप का वादा किया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे “जोखिम भरा लेकिन जरूरी प्रयोग” बता रहे हैं।
अमेरिका, ब्रिटेन और घाना जैसे देश पहले ही डिजिटल/हाइब्रिड जनगणना कर चुके हैं। भारत का यह कदम दुनिया के लिए नया बेंचमार्क सेट कर सकता है। 2027 की जनगणना न सिर्फ आंकड़े देगी, बल्कि डिजिटल इंडिया के असली सपने को भी साकार करेगी।
