कोलकाता, पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 लोकसभा सांसदों में से 22 सांसदों के बागी होने का दावा किया जा रहा है। बागी गुट ने लोकसभा में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग करने का फैसला किया है, जिससे पार्टी सुप्रीमो Mamata Banerjee के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी गुट
बागी सांसदों का नेतृत्व Kakoli Ghosh Dastidar कर रही हैं। उन्होंने दावा किया है कि पहले उनके साथ 20 सांसद थे, लेकिन अब दो और सांसद जुड़ने के बाद संख्या 22 हो गई है। बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष Om Birla से मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था और स्वतंत्र संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग करेंगे।
19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र आया सामने
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी सामने आया है। इसमें सताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, यूसुफ पठान, माला रॉय, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव) सहित कई सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग समूह के रूप में बैठने की मांग की गई है।
NDA को समर्थन देने का संकेत
बागी सांसदों ने संकेत दिया है कि यदि उन्हें अलग समूह के रूप में मान्यता मिलती है तो वे केंद्र में प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली NDA सरकार को समर्थन देंगे। यही कारण है कि इस घटनाक्रम को राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन नेता अभी भी ममता के साथ?
रिपोर्टों के अनुसार, TMC के कई प्रमुख नेता फिलहाल ममता बनर्जी के साथ बने हुए हैं। इनमें Abhishek Banerjee, Mahua Moitra, Kirti Azad, Shatrughan Sinha, सौगत रॉय और कल्याण बनर्जी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
क्या खत्म हो जाएगी TMC?
राजनीतिक दृष्टि से केवल सांसदों की बगावत से किसी पार्टी का तत्काल अस्तित्व समाप्त नहीं हो जाता। TMC अभी भी पश्चिम बंगाल में बड़ा जनाधार रखने वाली पार्टी है और राज्य स्तर पर उसका संगठन मजबूत माना जाता है। हालांकि यदि बड़ी संख्या में सांसदों का अलग होना आधिकारिक रूप से मान्य हो जाता है, तो यह पार्टी के लिए अब तक का सबसे बड़ा संसदीय झटका साबित हो सकता है।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम की दिशा लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय, दल-बदल कानून की व्याख्या और बागी सांसदों के अगले कदम पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल संसदीय विभाजन है या TMC के भीतर किसी बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत।
