योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दान में कथित हेराफेरी के मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सनातन मूल्यों और लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट मिलते ही तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि अयोध्या और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि अयोध्या की चिंता न करें। जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट आई, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई। आस्था के मामलों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि 19 जून को अयोध्या दौरे के दौरान भी सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। उस समय भी चेतावनी दी गई थी कि लोगों के विश्वास का दुरुपयोग करने या करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की किसी भी कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई की है और दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग धार्मिक संस्थाओं का दुरुपयोग करेंगे या श्रद्धालुओं की आस्था का गलत फायदा उठाने का प्रयास करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। बिना किसी दल का नाम लिए उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं, जबकि उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का हमेशा विरोध किया था। योगी ने कहा कि कुछ लोग पहले भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का विरोध करते रहे, जबकि दूसरी ओर रामभक्तों पर कार्रवाई की जाती थी।
गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दान में कथित हेराफेरी के मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष ढंग से जारी रहेगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
