नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए रूस, भूटान और मॉरीशस ने समर्थन दिया है। यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान की गई। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि मास्को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के लिए भारत और ब्राजील के आवेदन का समर्थन करता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक संतुलन 80 साल पहले संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय से काफी अलग हो गया है, इसलिए परिषद को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के लिए सुधार आवश्यक हैं।
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की अपनी मांग दोहराते हुए भारत और जापान को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने का समर्थन किया। उन्होंने महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को समकालीन वैश्विक परिस्थितियों और नई वास्तविकताओं के अनुरूप विकसित होना चाहिए।
मॉरीशस ने भी भारत की लंबे समय से चली आ रही दावेदारी का समर्थन किया। मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने कहा कि भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभर चुका है और उसकी वैश्विक मामलों में रचनात्मक भूमिका को देखते हुए उसे सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलनी चाहिए।
रूस के लावरोव ने यह भी कहा कि एससीओ और ब्रिक्स जैसे मंच विकासशील देशों के हितों को समन्वयित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और वैश्विक दक्षिण की सामूहिक स्थिति को आकार देने में मदद करते हैं।
इस अवसर पर, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए 2023 जोहान्सबर्ग-II घोषणापत्र का समर्थन दोहराया। इस घोषणापत्र में परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, प्रभावी और कुशल बनाने के लिए व्यापक बदलाव की आवश्यकता बताई गई है।
इस विकास से वैश्विक कूटनीति में भारत की सशक्त उपस्थिति और उसकी स्थायी सदस्यता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की संभावना बढ़ गई है।
