Raipur : रायपुर। रायपुर के तेलीबांधा तालाब किनारे पार्किंग शुल्क को लेकर मचे विवाद के बाद नगर निगम ने फिलहाल राहत देने का फैसला किया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क पर पार्किंग शुल्क तय कर लगाए गए बोर्डों से लोगों में भ्रम और नाराज़गी देखी गई थी। बढ़ते विरोध के बीच महापौर मीनल चौबे ने स्पष्ट किया है कि अभी पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा और इस पर अंतिम निर्णय सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ही होगा।
महापौर ने शनिवार शाम कहा कि सड़क पर खड़े वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूलना व्यावहारिक नहीं है। तेलीबांधा तालाब के आसपास नगर निगम के पास फिलहाल ऐसी कोई चिन्हित और व्यवस्थित पार्किंग स्थल मौजूद नहीं है, जहां शुल्क आधारित व्यवस्था लागू की जा सके। इसी को ध्यान में रखते हुए आगामी 15 दिनों तक तालाब क्षेत्र में आने वाले लोगों और वाहनों की मॉनिटरिंग की जाएगी।
उन्होंने बताया कि तालाब की दूसरी ओर सड़क किनारे कई बड़े कॉमर्शियल प्रतिष्ठान स्थित हैं, जहां आने वाले लोग अपने वाहन तालाब की ओर खड़े कर देते हैं। इससे यातायात अव्यवस्था की स्थिति बनती है। महापौर ने साफ किया कि सड़क पर यातायात नियंत्रण का अधिकार नगर निगम का नहीं, बल्कि यातायात पुलिस का है। ऐसे में निगम यातायात समिति और पुलिस प्रशासन के साथ बैठक कर समाधान निकालने पर विचार करेगा।

पहले भी हो चुका है विरोध
महापौर मीनल चौबे ने बताया कि साल 2021-22 में भी तेलीबांधा तालाब क्षेत्र में पार्किंग व्यवस्था को लेकर टेंडर निकाला गया था, लेकिन उस समय भाजपा संगठन और पार्षद दल ने कुछ विसंगतियों के चलते इसका विरोध किया था, जिसके बाद योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में पार्किंग शुल्क से जुड़ा निर्णय वर्ष 2017-18 के संकल्प के आधार पर लिया गया था, जिसमें पार्किंग दरें निर्धारित थीं। उसी आधार पर व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए फिलहाल इसे रोका गया है।
यातायात समिति से राय नहीं लेने का आरोप
इस मामले को लेकर कांग्रेस और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने निगम पर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व सभापति प्रमोद दुबे ने आरोप लगाया कि पार्किंग शुल्क तय करने से पहले यातायात समिति से राय नहीं ली गई, जो प्रक्रिया की बड़ी चूक है। उन्होंने कहा कि बिना समुचित चर्चा के केवल बोर्ड लगाकर दरें तय करना गलत तरीका है।

कांग्रेस का प्रदर्शन, निजीकरण का आरोप
तेलीबांधा मरीन ड्राइव के कथित व्यवसायीकरण के विरोध में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने नगर निगम और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए फैसले को जनविरोधी बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जीई रोड और मरीन ड्राइव शहर का प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र है, जहां पार्किंग ठेका देना नियमों के खिलाफ है।
कांग्रेस का आरोप है कि मरीन ड्राइव वर्षों से शहरवासियों के मॉर्निंग और इवनिंग वॉक का प्रमुख स्थल रहा है, लेकिन अब इसे व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। शहर अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन समेत कई नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला पूरी तरह वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

जबरन वसूली पर रोक की मांग
मरीन ड्राइव में कथित जबरन पार्किंग शुल्क वसूली को लेकर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री, रायपुर सांसद और शहर के चारों विधायकों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जब पार्किंग की समुचित व्यवस्था ही नहीं है, तो शुल्क वसूली किस आधार पर की जा रही है।
