भूपेश बघेल ने कहा कि रामभद्राचार्य जी गौ-भक्त और रामभक्त हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किरण रिजिजू को मंत्रिमंडल में क्यों रखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या रामभद्राचार्य जी इसे उचित मानते हैं।
धीरेंद्र शास्त्री को लेकर भी कही बात
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे तंज कसते हुए कहा कि वह रामभद्राचार्य जी से विनम्र निवेदन करते हैं कि वे अपने चेले धीरेंद्र शास्त्री को निर्देशित करें कि पेट्रोल-डीजल के दाम कम करवाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि रामभद्राचार्य जी बड़े ज्ञानी और गुणी हैं, इसलिए वे अपनी “दिव्य दृष्टि” से यह भी बताएं कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने इतना झुकते क्यों हैं।
चरणदास महंत के बयान से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के बयान के बाद शुरू हुआ। महंत ने मीडिया से चर्चा में कहा था कि वह रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानते और उनके अनुसार वे भाजपा के प्रचारक की तरह काम कर रहे हैं।
उन्होंने यहां तक कहा था कि वे उन्हें “न जगद्गुरु मानते हैं और न ही गांव का गुरु।” इसके बाद प्रदेश की राजनीति में धर्म और राजनीति को लेकर बयानबाजी तेज हो गई।
भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के बयानों को सनातन धर्म पर हमला बताते हुए विरोध जताया है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि बयान पूरी तरह राजनीतिक संदर्भ में दिया गया था और धर्म का अपमान करना उद्देश्य नहीं था।
ज्योत्स्ना महंत ने भी दी प्रतिक्रिया
ज्योत्स्ना महंत ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धर्म की आड़ लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और जनप्रतिनिधियों को सेवा भाव से काम करना चाहिए।
चिरमिरी की रामकथा में दिया था जवाब
चिरमिरी में आयोजित रामकथा के दौरान रामभद्राचार्य ने मंच से कहा था कि यदि कोई उनके जगद्गुरुत्व को चुनौती देता है, तो वह इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उनके इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया।
