नई दिल्ली। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने क्रिकेट की प्लेइंग कंडीशंस में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 या उसके बाद शुरू होने वाली इंटरनेशनल सीरीज पर लागू होंगे। पहले से जारी सीरीज में पुराने नियम ही लागू रहेंगे। नए बदलावों का असर टेस्ट, वनडे और टी20 इंटरनेशनल तीनों फॉर्मेट पर पड़ेगा।
समय बर्बाद करने पर बल्लेबाज को 5 रन की सजा
नए नियमों के तहत बल्लेबाज द्वारा जानबूझकर समय बर्बाद करने पर पेनल्टी का प्रावधान किया गया है। यदि बल्लेबाज निर्धारित समय के भीतर अगली गेंद खेलने के लिए तैयार नहीं होता है, तो पहली बार चेतावनी दी जाएगी। दूसरी बार अंतिम चेतावनी मिलेगी, जबकि तीसरी और उसके बाद हर गलती पर फील्डिंग टीम को 5 पेनल्टी रन दिए जाएंगे। लगातार उल्लंघन की स्थिति में कोड ऑफ कंडक्ट के तहत भी कार्रवाई हो सकती है।
महिला और जूनियर क्रिकेट की गेंदों के मानक बदले
ICC ने महिला और जूनियर क्रिकेट के लिए इस्तेमाल होने वाली गेंदों के वजन और आकार से जुड़े मानकों में भी बदलाव किया है। अब इन दोनों श्रेणियों के लिए गेंदों की तीन अलग-अलग कैटेगरी निर्धारित की गई हैं। साथ ही महिला क्रिकेट की गेंदों के निर्माण में ज्यादा सख्त टॉलरेंस सीमा लागू होगी।
ओवरथ्रो और मिसफील्ड की परिभाषा होगी स्पष्ट
नए नियमों में ओवरथ्रो और मिसफील्ड के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया गया है। यदि रन रोकने या रन आउट करने के उद्देश्य से स्टंप की ओर गेंद फेंकी जाती है और उसके बाद गेंद आगे निकल जाती है, तो इसे ओवरथ्रो माना जाएगा। वहीं गेंद रोकने या दूसरे फील्डर को पास करने के दौरान हुई गलती को मिसफील्ड की श्रेणी में रखा जाएगा।
डेड बॉल को लेकर अंपायर को अधिक स्पष्ट अधिकार
अब अंपायर को यह तय करने का अधिकार होगा कि गेंद कब डेड या पूरी तरह से सेटल्ड हो चुकी है। इसके लिए गेंद का गेंदबाज या विकेटकीपर के हाथ में होना जरूरी नहीं होगा। इससे खेल के आखिरी पलों में गेंद की स्थिति को लेकर होने वाले विवादों में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
रन आउट और स्टंपिंग के लिए गेंद पर पूरा नियंत्रण जरूरी
विकेट गिराने के दौरान फील्डर के हाथ का सिर्फ गेंद को छूना पर्याप्त नहीं होगा। नए नियम के मुताबिक विकेट बिखेरते समय फील्डर का गेंद पर पूरा नियंत्रण होना जरूरी होगा। इससे रन आउट और स्टंपिंग के मामलों में गेंद पर नियंत्रण की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाएगी।
डे-टेस्ट में पिंक बॉल के इस्तेमाल का विकल्प
टेस्ट क्रिकेट में भी एक बड़ा बदलाव किया गया है। खराब रोशनी के कारण खेल प्रभावित होने की स्थिति से निपटने के लिए दोनों टीमें आपसी सहमति से डे-टेस्ट में पिंक बॉल इस्तेमाल कर सकती हैं। यह फैसला मैच शुरू होने से पहले लेना होगा। एक बार पिंक बॉल से खेलने का निर्णय होने के बाद पूरे मैच में उसी गेंद का इस्तेमाल किया जाएगा और मैच के बीच में लाल गेंद से पिंक गेंद में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
आखिरी ओवर में विकेट गिरने पर जारी रहेगा खेल
टेस्ट मैच में दिन के आखिरी ओवर के दौरान अगर विकेट गिर जाता है और ओवर की कुछ गेंदें बाकी हैं, तो दिन का खेल तुरंत समाप्त नहीं होगा। बची हुई गेंदें उसी दिन पूरी की जाएंगी।
वनडे और टी20 में वाइड का नियम स्थायी
बल्लेबाज के क्रीज पर मूवमेंट से जुड़ा वाइड बॉल का नियम अब स्थायी रूप से प्लेइंग कंडीशंस का हिस्सा होगा। गेंद डाले जाने के समय बल्लेबाज के पैरों की शुरुआती स्थिति को वाइड तय करने का संदर्भ माना जाएगा, भले ही बल्लेबाज इसके बाद ऑफ स्टंप की ओर मूव करे।
ड्रिंक्स ब्रेक में हेड कोच कर सकेंगे मैदान पर बातचीत
वनडे और टी20 इंटरनेशनल में ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान हेड कोच को मैदान पर आकर खिलाड़ियों के साथ रणनीति पर चर्चा करने की अनुमति होगी। इससे छोटे ब्रेक के दौरान टीमों को रणनीति में बदलाव करने का आधिकारिक अवसर मिलेगा।
T20I में 15 मिनट का निर्धारित ब्रेक
टी20 इंटरनेशनल मैचों में दोनों पारियों के बीच अब 15 मिनट का निर्धारित ब्रेक होगा। हालांकि, समय की बर्बादी की स्थिति में इस ब्रेक को घटाकर 10 मिनट तक किया जा सकता है। नए नियमों के जरिए ICC ने खेल के समय और मैच संचालन को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में बदलाव किए हैं।
