नई दिल्ली, भारत हिमाचल प्रदेश में चिनाब नदी की सहायक चंद्रा नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी के बेसिन की ओर मोड़ने वाली चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना पर काम कर रहा है। मई 2026 में मंजूर हुई इस परियोजना को जल संसाधन, सिंचाई और जलविद्युत की जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान इस परियोजना को लेकर आपत्ति जता रहा है और इसे सिंधु जल संधि के प्रावधानों से जोड़ रहा है।
चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना क्या है?
इस परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में चिनाब की सहायक चंद्रा नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन की ओर ले जाने की योजना है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2,352 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके तहत पीर पंजाल पर्वतमाला के पार लगभग 8.7 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाई जा रही है।
परियोजना में लाहौल घाटी के कोकसर के पास चंद्रा नदी पर करीब 19 मीटर ऊंचा बैराज बनाने का भी प्रावधान है। इस जल को पेयजल और सिंचाई के अलावा जलविद्युत उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने की बात कही गई है।
पाकिस्तान को परियोजना से क्या आपत्ति है?
पाकिस्तान की आपत्ति मुख्य रूप से सिंधु जल संधि से जुड़ी है। संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों में सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां तथा रावी, ब्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां माना गया था।
पाकिस्तान का कहना है कि चिनाब की सहायक नदी के पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ने की परियोजना संधि से जुड़े प्रावधानों के सवाल खड़े करती है। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। ऐसे में यह परियोजना भारत-पाकिस्तान के बीच जल विवाद के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हो गई है।
चंद्रा नदी के पानी को कैसे मोड़ा जाएगा?
परियोजना के तहत चंद्रा नदी पर बैराज बनाकर नदी के एक हिस्से के पानी को प्रस्तावित सुरंग में ले जाने की योजना है। एक आकलन के अनुसार, सुरंग का निकास मनाली के ऊपरी क्षेत्र में धुंधी, पालचन या सोलांग के आसपास हो सकता है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक निविदा दस्तावेज में निकास स्थल का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
NHPC के 29 मई के सार्वजनिक निविदा नोटिस में परियोजना के सिविल कार्यों की अनुमानित लागत करीब 2,253.97 करोड़ रुपये बताई गई थी।
हिमाचल, पंजाब और हरियाणा को भी लाभ की बात
परियोजना से जुड़े बयानों में कहा गया है कि अतिरिक्त जल प्रवाह का इस्तेमाल हिमाचल प्रदेश के साथ पंजाब और हरियाणा की जल जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। इसके अलावा अतिरिक्त पानी से निचले क्षेत्रों में स्थित पनबिजली परियोजनाओं को भी लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना भारत में नदी जल के बेहतर उपयोग और जल संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना है। वहीं, पाकिस्तान की आपत्ति के कारण इसका संबंध भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सिंधु जल विवाद से भी जुड़ गया है। परियोजना के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए इसके तकनीकी प्रावधानों और सिंधु जल संधि के लागू प्रावधानों को अलग-अलग देखना जरूरी होगा।
