बालाघाट। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट दौरे पर पहुंचे हैं। वे उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात करेंगे, जिनके बच्चों की हाल ही में बीमारी, कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हुई है। राहुल गांधी ने इन घटनाओं को लेकर भाजपा सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने अपने दौरे की जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने कहा कि वे उन आदिवासी परिवारों से मिलने बालाघाट आ रहे हैं, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के साथ समय बिताकर उन्हें यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि वे इस दुख की घड़ी में अकेले नहीं हैं।
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ समय से चर्चा में है। क्षेत्र में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। हालांकि, मृत बच्चों की संख्या और मौत के कारणों को लेकर अलग-अलग आंकड़े और दावे सामने आए हैं।
जांच में कई स्वास्थ्य कारण सामने आए
मामले की जांच में किसी एक बीमारी को सभी मौतों का एकमात्र कारण नहीं बताया गया है। जांच के दौरान खसरा, मलेरिया, एक से अधिक संक्रमण, सांस लेने में परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसी स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में बच्चों की मौत को किसी एक बीमारी से जोड़कर देखना उचित नहीं माना गया है।
केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासियों का मुद्दा भी उठाया
राहुल गांधी अपने बालाघाट दौरे के दौरान केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के मुद्दे को भी उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि परियोजना के कारण प्रभावित गांवों के लोगों को उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला है। राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को अपने गांवों के डूब क्षेत्र में आने के बावजूद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आदिवासी छात्रों की समस्याओं का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने हाल में इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान आदिवासी छात्रों की समस्याओं का भी उल्लेख किया था। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, छात्रावासों, भोजन व्यवस्था, परीक्षाओं और आरक्षण से जुड़े मुद्दों को उठाया था। उन्होंने कहा था कि आदिवासी समुदाय की आवाज को उठाना उनकी जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी का बालाघाट दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब आदिवासी बच्चों की मौत, स्वास्थ्य सुविधाओं और कुपोषण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। उनके पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
