वॉशिंगटन, 18 सितंबर 2026। अमेरिका और रूस के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी संसद ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को मंजूरी दी है। इस विधेयक के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा, जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं अथवा मॉस्को को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।
हालांकि, रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रावधानों में छूट रखी गई है। विधेयक में रूस से यूरेनियम आयात से जुड़े मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने का प्रावधान है, लेकिन अमेरिका-रूस के नागरिक परमाणु सहयोग समझौतों और परमाणु रिएक्टरों में इस्तेमाल होने वाले कम-संवर्धित यूरेनियम के कुछ आयातों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
अमेरिकी परमाणु ईंधन आपूर्ति में रूस की महत्वपूर्ण भूमिका इस छूट की प्रमुख वजहों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में अमेरिकी सिविल न्यूक्लियर ऑपरेटरों को कुल 12.71 मिलियन SWU की संवर्धन सेवाएं मिलीं। इनमें रूस की हिस्सेदारी 3.284 मिलियन SWU यानी करीब 26 प्रतिशत रही। इसी अवधि में अमेरिका की घरेलू संवर्धन क्षमता की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत थी, जबकि फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड भी अमेरिकी परमाणु ईंधन आपूर्ति में शामिल रहे।
अमेरिका लंबे समय से रूस पर अपनी परमाणु ईंधन निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। मई 2024 में वॉशिंगटन ने रूसी यूरेनियम उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि, कंपनियों को 1 जनवरी 2028 तक कुछ परिस्थितियों में छूट मांगने की अनुमति दी गई थी। अमेरिकी परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए 2.72 अरब डॉलर की फंडिंग भी की गई।
विधेयक में रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, बड़े उद्योगपतियों, ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘शैडो फ्लीट’ टैंकरों को भी निशाना बनाने का प्रावधान है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के अनुसार, कानून का उद्देश्य रूसी तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन में रूस के युद्ध प्रयासों के लिए आर्थिक समर्थन को सीमित करना है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने विधेयक को 262-159 वोटों से पारित किया, जबकि सीनेट ने इसे 86-11 वोटों से मंजूरी दी। अब विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए जाएगा। इसके लागू होने के बाद रूस से जुड़े ऊर्जा कारोबार और उसके प्रमुख खरीदार देशों पर अमेरिकी आर्थिक दबाव बढ़ सकता है, जबकि परमाणु ईंधन आपूर्ति को लेकर कुछ सीमित अपवाद बनाए रखे गए हैं।
