Bangladesh’s New President Mirza Fakhrul Islam Alamgir : ढाका : बांग्लादेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सत्तारूढ़ पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज और वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का नया राष्ट्रपति चुन लिया गया है। 78 वर्षीय आलमगीर बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। वह शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 की शाम को बंगभवन के दरबार हॉल में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
एकतरफा मुकाबले में मिली बड़ी जीत
मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, संसद में हुए इस राष्ट्रपति चुनाव में कुल 349 पंजीकृत सांसदों में से 343 ने मतदान किया।
- मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (BNP): 255 वोट
- कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (विपक्ष): 88 वोट
आलमगीर ने जमात-ए-इस्लामी समर्थित 11-दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को करारी शिकस्त दी।
35 साल बाद बना अनोखा इतिहास
बांग्लादेश के इतिहास में यह चुनाव बेहद खास माना जा रहा है। पिछले 35 वर्षों (1991 के बाद) में यह पहली बार है जब राष्ट्रपति पद के लिए बकायदा वोटिंग और मुकाबला हुआ है। इससे पहले के दशकों में इस पद के लिए आम सहमति बना ली जाती थी और उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाते थे।
क्यों खाली हुआ था राष्ट्रपति का पद?
यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद जरूरी हो गया था। शेख हसीना सरकार के करीबी माने जाने वाले शहाबुद्दीन ने पिछले महीने 24 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद से संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका निभा रहे थे।
कौन हैं नए राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम?
- करियर की शुरुआत: मिर्जा फखरुल ने ढाका विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और 1972 में ढाका कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी।
- राजनीतिक सफर: 1990 के दशक में वे राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हुए। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की सरकार में कृषि, नागरिक उड्डयन और पर्यटन जैसे मंत्रालयों के राज्य मंत्री रह चुके हैं।
- संकट के साथी: शेख हसीना के 15 साल के शासनकाल के दौरान जब पार्टी के शीर्ष नेता जेल में या देश से बाहर थे, तब आलमगीर ने ही बीएनपी (BNP) को संभाला और पार्टी के महासचिव (Secretary General) के रूप में विपक्ष की सबसे मुखर आवाज बने।
भारत और पड़ोसियों पर क्या होगा असर?
बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक होता है, जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और कैबिनेट के पास होती हैं। हालांकि, बांग्लादेश में आए इस नए राजनीतिक बदलाव के बाद भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों और तीस्ता व गंगा जल संधि जैसे बड़े मुद्दों पर नए सिरे से बातचीत की उम्मीद की जा रही है।
