नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में जल्द ही बड़ा फेरबदल होने के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों की सूची के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी ने राज्यसभा के लिए जिन आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, उनमें किसी भी मौजूदा राज्यसभा सदस्य को दोबारा मौका नहीं दिया गया है। खास बात यह है कि केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा को भी राज्यसभा का उम्मीदवार नहीं बनाया गया है।
दोनों केंद्रीय मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कैबिनेट फेरबदल की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम को मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
यूपी से राज्यसभा के लिए भाजपा ने घोषित किए 8 उम्मीदवार
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा ने सोमवार को इनमें से अपने आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया। पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा की सूची की सबसे खास बात यह रही कि पार्टी ने किसी भी मौजूदा उम्मीदवार को दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला नहीं किया। इसी के साथ हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को भी उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में केंद्रीय मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।
हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का कार्यकाल खत्म होने वाला
हरदीप सिंह पुरी केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हैं, जबकि बीएल वर्मा भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा हैं। दोनों नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। पार्टी की ओर से उन्हें दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर भी अटकलें शुरू हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, जो केंद्रीय मंत्री राज्यसभा के जरिए संसद पहुंचे हैं, उनके लिए सदन की सदस्यता खत्म होने के बाद मंत्री पद पर बने रहना संवैधानिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं से जुड़ा विषय होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा नेतृत्व की ओर से इस संबंध में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
कुरियन और बिट्टू के इस्तीफों के बाद भी बढ़ी चर्चा
केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चा उस समय और तेज हुई है, जब कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू से जुड़े इस्तीफों का घटनाक्रम सामने आया। इन घटनाओं और राज्यसभा के लिए नए चेहरों को मौका दिए जाने को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को लेना है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि फेरबदल कब होगा और किन मंत्रियों को हटाया या नई जिम्मेदारी दी जाएगी।
कैबिनेट में नए चेहरों के लिए पहले से जगह
मोदी सरकार में नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 81 तक हो सकती है और मौजूदा संख्या इस सीमा से कम बताई जाती है। ऐसे में यदि पार्टी कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी देती है या कुछ मंत्रियों को पद से हटाती है, तो नए नेताओं को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सकती है।
भाजपा की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संभावित फेरबदल में किन नेताओं को मौका मिलेगा। पार्टी के सामने क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ संगठन में सक्रिय नेताओं को सरकार में जिम्मेदारी देने का विकल्प भी मौजूद है।
कब होगा कैबिनेट फेरबदल?
फिलहाल मोदी कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है। लेकिन यूपी राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा, हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को टिकट नहीं मिलना तथा अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद फेरबदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
अब नजर इस बात पर है कि भाजपा नेतृत्व आगामी दिनों में केंद्रीय मंत्रिपरिषद को लेकर क्या फैसला करता है। अगर फेरबदल होता है तो इसमें कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव के साथ कई नए चेहरों को भी केंद्र सरकार में जगह मिल सकती है।
