छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला मुआवजा घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पहली गिरफ्तारी की है। ईडी ने अभनपुर के कारोबारी जयप्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार कारोबारी को बुधवार को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया।
इसके साथ ही मामले के मुख्य आरोपी हरमीत सिंह खनूजा समेत चार लोगों के खिलाफ परिवाद भी पेश किया गया है।
गौरतलब है कि 27 अप्रैल को ईडी ने जयप्रकाश गांधी के अभनपुर स्थित आवास और कार्यालय पर छापेमार कार्रवाई की थी। जांच एजेंसी की 13 सदस्यीय टीम ने कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए थे। उस समय से ही कारोबारी एजेंसी की जांच के दायरे में था।
भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया था। जांच एजेंसियों के अनुसार सरकारी अधिकारियों, भू-माफियाओं और बिचौलियों की कथित मिलीभगत से करोड़ों रुपये के मुआवजे में हेराफेरी की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान 500 करोड़ रुपये से अधिक के गबन की आशंका है। आरोप है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि भूमि के रूप में दर्ज कराकर मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ा दी गई।
ईडी की जांच के अनुसार राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और जमीन कारोबारियों की मिलीभगत से एक ही खसरा नंबर की भूमि को कागजों में छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग लोगों के नाम पर अधिक मुआवजा स्वीकृत कराया गया।
मामले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा भी शामिल रही है। एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और कथित वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही हैं। जयप्रकाश गांधी की गिरफ्तारी को इस बहुचर्चित घोटाले में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है और आने वाले दिनों में जांच के दायरे में अन्य लोगों के भी आने की संभावना जताई जा रही है।
