CG : रायपुर। रायपुर में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार है और अब राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चलना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
पर्यावरण संरक्षण हमारी संस्कृति का हिस्सा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण संतुलन और धरती की सेहत का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली भारत की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा रही है और सरकार भी इसी दिशा में नीतिगत स्तर पर लगातार प्रयास कर रही है।
जलवायु संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। ऐसे में केवल चर्चा से काम नहीं चलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उपायों को व्यवहार में भी उतारना होगा। उन्होंने कहा कि हरित शिखर सम्मेलन जैसे मंच नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और पर्यावरण विशेषज्ञों को एक साथ लाकर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करते हैं।
ग्रीन स्टील और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ता राज्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश में इस्पात उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। साथ ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से लोगों को ऊर्जा उत्पादक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, जिससे पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
वन संपदा और जनजातीय परंपराओं से सीख
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। यहां के आदिवासी समाज में प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान और जुड़ाव देखने को मिलता है। वन क्षेत्रों में वृक्षों को सरना देवता के रूप में पूजा जाता है और कई स्थानों पर इन्हें राजस्व अभिलेखों में देवस्थल के रूप में भी दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज रूप से सीखा जा सकता है।
हरित पहल को नई औद्योगिक नीति में प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में पर्यावरण अनुकूल उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जो उद्योग हरित पहल को अपनाएंगे, उन्हें विभिन्न प्रकार की रियायतें प्रदान की जाएंगी।
इसके साथ ही सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
सम्मेलन में पुस्तकों का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय परंपराओं और कहानियों पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का भी विमोचन किया।
इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
