महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उनके जाने से न केवल मंत्रिमंडल में शक्ति संतुलन बिगड़ा है, बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के भविष्य और उसके दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं।
विमान दुर्घटना में अजित पवार की मृत्यु के बाद महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेताओं द्वारा सुनेत्रा पवार को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की मांग उठाई जा रही है, वहीं पार्टी का एक वर्ग शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट के साथ पुनः एकजुट होने की वकालत कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, एनसीपी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अजित पवार के पास रहे विभागों का आवंटन पार्टी को किए जाने की मांग कर सकती है। अजित पवार के पास वित्त, योजना और राज्य उत्पाद शुल्क जैसे अहम विभाग थे। इसके अतिरिक्त, खेल, युवा कल्याण और अल्पसंख्यक विकास विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हीं के पास था। उनके निधन के बाद ये सभी विभाग फिलहाल रिक्त हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि 23 फरवरी को राज्य का बजट पेश किया जाना प्रस्तावित है। परंपरागत रूप से यह जिम्मेदारी वित्त मंत्री के रूप में अजित पवार निभाते थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं बजट प्रस्तुत कर सकते हैं।
अजित पवार गुट के भीतर भी मतभेद उभरकर सामने आए हैं। एक धड़ा महायुति गठबंधन में बने रहने का पक्षधर है, जबकि दूसरा धड़ा शरद पवार के साथ पुनः गठबंधन चाहता है। गौरतलब है कि हाल के नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों के साथ लड़ने से विलय की अटकलों को और बल मिला था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एनसीपी (अजित पवार गुट) महायुति से अलग होती है, तो इससे एकनाथ शिंदे की शिवसेना को मजबूती मिल सकती है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी एनसीपी को गठबंधन में बनाए रखने के लिए प्रयास तेज कर सकती है।
अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों का आवंटन और एनसीपी के भविष्य को लेकर बड़े फैसले संभव हैं।
