विश्व एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जागरूकता सप्ताह पर जागरूकता का संदेश
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में विश्व एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जागरूकता सप्ताह के अवसर पर फार्माकोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत उपयोग विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एंटीबायोटिक का तर्कसंगत उपयोग बेहद जरूरी है। एंटीबायोटिक का गलत या अनावश्यक उपयोग संक्रमणकारी जीवाणुओं में प्रतिरोध पैदा करता है, जिससे उपचार जटिल हो जाता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा को निर्धारित अवधि और मात्रा में ही लेना चाहिए, तभी उसका प्रभाव सुनिश्चित होता है।
फार्माकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. उषा जोशी ने AMR की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए बताया कि जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं, तब संक्रमण का इलाज कठिन हो जाता है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष 18 से 24 नवंबर के बीच आयोजित होने वाला एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस अवेयरनेस वीक इसी जागरूकता को बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
उन्होंने “एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप” को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताते हुए कहा कि यह सही दवा, सही समय और सही अवधि में उपयोग सुनिश्चित कर मरीजों के बेहतर उपचार परिणाम देता है और मल्टीड्रग रेजिस्टेंस को रोकने में सहायक है।
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिखा जायसवाल ने AMR के कारणों तथा बचाव के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से डॉ. रूपम गहलोत ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के वैश्विक भार (Global Burden) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने एंटीबायोटिक के विकास इतिहास पर भी संक्षिप्त चर्चा की।
कार्यक्रम में डॉ. ओंकार खंडवाल, डॉ. शुभ्रा अग्रवाल, डॉ. नेहा श्रीवास्तव, डॉ. माया रामटेके, डॉ. संदीप अग्रवाल सहित विभिन्न कक्षाओं के 250 से अधिक एमबीबीएस छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
अंत में सभी प्रतिभागियों को एंटीबायोटिक के सीमित एवं तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई गई। इसी अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता, क्विज़ एवं स्लोगन कंपटीशन आयोजित किए गए, जिनका समापन पुरस्कार वितरण के साथ हुआ।
