Mahasamund में करीब 1.5 करोड़ रुपये की एलपीजी गैस चोरी और हेराफेरी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और उनके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के Kolhapur से गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस जांच में इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड खाद्य अधिकारी अजय यादव को बताया जा रहा है। आरोप है कि एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा दिलाने, फर्जी तौल पंचनामा तैयार कराने और रिकॉर्ड में हेराफेरी करने में उसकी अहम भूमिका थी।
जांच में यह भी सामने आया कि खाद्य विभाग कार्यालय में ही फर्जी पंचनामों पर हस्ताक्षर कराए गए। पुलिस के मुताबिक गैस स्टॉक को जल्दी खाली करवाने और वास्तविक तौल प्रक्रिया से बचने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई थी।
एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों में अजय यादव की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई है। वहीं मुख्य आरोपी संतोष ठाकुर और सार्थक सिंह ठाकुर गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार Raipur, Pune, Mumbai और कोल्हापुर में अपने ठिकाने बदल रहे थे।
पुलिस ने 11 शहरों में टावर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टोल प्लाजा डेटा और सोशल मीडिया ट्रैकिंग के जरिए आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की। आखिरकार कोल्हापुर के एक होटल में उनके छिपे होने की सूचना मिलने पर महासमुंद पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस की मदद से दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में सामने आया है कि करीब 87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी की गई। आरोप है कि आपदा की स्थिति का फायदा उठाकर बिना जीएसटी के अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को गैस बेची गई। पुलिस के अनुसार अप्रैल महीने में 40 टन गैस की खरीद दिखाई गई, जबकि बिक्री 135 टन तक दर्ज की गई। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
