रमन सिंह ने राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम में शतरंज का प्रशिक्षण ले रहे नन्हें खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनकी प्रतिभा और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव को राज्य के प्रमुख “चेस हब” के रूप में विकसित किया जाएगा।
डॉ. सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर में शतरंज को बढ़ावा देने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि खिलाड़ियों को वर्षभर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं का अवसर मिल सके।
भविष्य के चैंपियनों की नर्सरी बनेगा दिग्विजय स्टेडियम
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि दिग्विजय स्टेडियम अब केवल खेल मैदान नहीं, बल्कि भविष्य के वैश्विक चैंपियनों की नर्सरी बनता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की सुविधा के लिए स्टेडियम में करीब 29 लाख रुपये की लागत से खेल अधोसंरचना और अन्य आवश्यक सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। उनके अनुसार, शतरंज जैसे बौद्धिक खेल युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
7 वर्षीय माहिका की प्रतिभा से प्रभावित हुए डॉ. रमन सिंह
स्टेडियम भ्रमण के दौरान डॉ. रमन सिंह ने सात वर्षीय नन्हीं खिलाड़ी माहिका डाकलिया से विशेष मुलाकात की। कक्षा दूसरी में अध्ययनरत माहिका ने बताया कि वे गत वर्ष खुर्दा रोड में आयोजित राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता के अंडर-7 वर्ग में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
माहिका की उपलब्धि और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सराहना की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
