नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड दर्ज करने के मौजूदा तरीके पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाते समय विरोधी टीम के स्तर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने फुटबॉल लीग की तरह डिवीजन आधारित व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। उनके मुताबिक, पूर्ण सदस्य देशों और एसोसिएट सदस्य देशों के बीच होने वाले मुकाबलों के आंकड़ों को एक ही पैमाने पर देखना उचित नहीं है।
T20I में टीमों के स्तर के आधार पर रिकॉर्ड रखने की मांग
सुनील गावस्कर की यह टिप्पणी उस समय आई, जब पुरुष T20 वर्ल्ड कप सब-रीजनल एशिया क्वालीफायर में थाईलैंड के खिलाफ 193 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मंगोलिया की टीम महज 13 रन पर ऑलआउट हो गई। इस प्रदर्शन ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा के स्तर को लेकर बहस छेड़ दी।
गावस्कर ने अपने कॉलम में उल्लेख किया कि टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम स्कोर का रिकॉर्ड आइवरी कोस्ट के नाम है, जिसकी टीम नाइजीरिया के खिलाफ केवल 7 रन पर सिमट गई थी। उन्होंने मंगोलिया के 10 रन पर आउट होने वाले पिछले मुकाबले का भी जिक्र किया।
गावस्कर का कहना है कि ऐसे मुकाबलों में गेंदबाजों के आंकड़े काफी प्रभावशाली दिखाई दे सकते हैं, लेकिन जब इनकी तुलना शीर्ष क्रिकेट खेलने वाले देशों के बीच हुए मुकाबलों से की जाती है, तो प्रतिस्पर्धा के स्तर का अंतर स्पष्ट नहीं हो पाता।
फुटबॉल की तर्ज पर डिवीजन सिस्टम का सुझाव
गावस्कर ने फुटबॉल लीग की व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अलग-अलग डिवीजन में टीमें खेलती हैं और उनके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन तथा रेलीगेशन की व्यवस्था होती है। इससे हर स्तर पर बने रिकॉर्ड उसी डिवीजन के संदर्भ में देखे जा सकते हैं।
उनके सुझाव के मुताबिक, क्रिकेट में भी टीमों को उनके प्रतिस्पर्धी स्तर के आधार पर वर्गीकृत करने पर विचार किया जा सकता है। इससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन और रिकॉर्ड की तुलना करते समय यह समझना आसान होगा कि आंकड़े किस स्तर की प्रतिस्पर्धा में बने हैं।
हालांकि, यह सुनील गावस्कर का प्रस्ताव है। क्रिकेट की नियामक संस्थाओं ने इस आधार पर रिकॉर्ड दर्ज करने के नियमों में बदलाव की घोषणा नहीं की है।
दीपेंद्र सिंह ऐरी के रिकॉर्ड पर भी उठाया सवाल
गावस्कर ने नेपाल के बल्लेबाज दीपेंद्र सिंह ऐरी की नौ गेंदों में टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक बनाने की उपलब्धि के संदर्भ में भी सवाल उठाए। ऐरी ने युवराज सिंह के 12 गेंदों में अर्धशतक बनाने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। युवराज ने 2007 के टी20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की थी।
गावस्कर ने नेपाल क्रिकेट की प्रगति को स्वीकार करते हुए कहा कि एसोसिएट देशों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उनका सवाल यह है कि अलग-अलग स्तर की टीमों के खिलाफ बनाए गए रिकॉर्ड की तुलना किस तरह की जानी चाहिए।
रणजी ट्रॉफी के रिकॉर्ड पर भी पुनर्विचार की बात
सुनील गावस्कर ने केवल अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट ही नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी के आंकड़ों पर भी पुनर्विचार करने की जरूरत बताई। विशेष रूप से प्लेट ग्रुप में खेलने वाली टीमों के रिकॉर्ड को लेकर उन्होंने प्रतिस्पर्धा के स्तर को ध्यान में रखने का सुझाव दिया।
इस बहस का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या सभी आधिकारिक मुकाबलों में बने रिकॉर्ड को समान रूप से देखा जाना चाहिए या रिकॉर्ड के साथ प्रतिस्पर्धा के स्तर का संदर्भ भी दर्ज किया जाना चाहिए।
फिलहाल, क्रिकेट में रिकॉर्ड दर्ज करने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। लेकिन गावस्कर के इस सुझाव से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट में आंकड़ों की तुलना करने के तरीके पर नई चर्चा शुरू हो सकती है।
