नई दिल्ली, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों का INDIA गठबंधन बुधवार को नई दिल्ली में बैठक करने जा रहा है। बैठक में निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रणनीति, प्रस्तावित आंदोलन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में लाए जाने वाले प्रस्ताव पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और जयराम रमेश समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल होने वाले हैं। तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के भी बैठक में शामिल होने की जानकारी है। समाजवादी पार्टी की ओर से सांसद हरेंद्र मलिक और मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी बैठक में प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि अखिलेश यादव इसमें शामिल नहीं होंगे।
CEC को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा
बैठक के एजेंडे में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने से जुड़ा विषय भी शामिल है। विपक्षी दलों की ओर से इस मुद्दे पर आगे की रणनीति और व्यापक अभियान को लेकर चर्चा की जाएगी। AAP ने बैठक में शामिल नहीं होने की बात कही है, लेकिन पार्टी सांसद संजय सिंह के अनुसार, यदि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसमें विपक्षी दलों के साथ शामिल होगी।
SIR को लेकर भी चर्चा
बैठक में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर भी विपक्षी दल अपने विचार रखेंगे। SIR की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग के निर्णयों को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। वहीं निर्वाचन आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले आयोग के सभी तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
किन दलों की मौजूदगी, कौन रहेगा बाहर?
बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, वाम दलों और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) समेत कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी है। द्रमुक और आम आदमी पार्टी बैठक में शामिल नहीं होंगी। हालांकि, AAP ने CEC के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाए जाने की स्थिति में समर्थन की बात कही है।
बैठक से पहले विपक्षी नेताओं के बयानों में निर्वाचन आयोग और SIR को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि बैठक में विपक्षी दलों से सुझाव लिए जाएंगे और इसके बाद आगे के आंदोलन के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस बैठक को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी दलों की निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर समन्वय की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
