भारत और जापान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच जापान अपने F-2 लड़ाकू विमानों को पहली बार भारत में संयुक्त हवाई अभ्यास के लिए भेजने की तैयारी कर रहा है। इस संभावित तैनाती को लेकर चीन में हलचल बढ़ गई है। चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इसे भारत और जापान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग तथा क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरण से जोड़ते हुए चेतावनी दी है।
भारत में पहली बार होगी F-2 की तैनाती
रिपोर्ट के मुताबिक, जापान इस महीने के अंत तक प्रस्तावित संयुक्त हवाई अभ्यास के लिए अपने F-2 लड़ाकू विमानों को भारत भेज सकता है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह जापानी लड़ाकू विमानों की भारत में पहली द्विपक्षीय प्रशिक्षण तैनाती होगी।
भारत और जापान के बीच इससे पहले 2023 में जापान में संयुक्त फाइटर एयर एक्सरसाइज आयोजित की गई थी। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ता सैन्य सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उनकी रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है।
F-2 जापान का प्रमुख लड़ाकू विमान
F-2 जापान का विकसित किया गया लड़ाकू विमान है, जिसे अमेरिकी F-16 से संबंधित डिजाइन पर विकसित किया गया है। इसे जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स यानी JASDF के प्रमुख लड़ाकू विमानों में गिना जाता है।
जापानी F-2 की भारत में संभावित तैनाती दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे दोनों देशों की वायु सेनाओं को संयुक्त प्रशिक्षण और संचालन संबंधी अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा।
राजनाथ सिंह से मुलाकात कर सकते हैं जापानी रक्षा मंत्री
रिपोर्ट के अनुसार, जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइज़ुमी के 17 अगस्त से भारत और ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर आने की उम्मीद है। भारत यात्रा के दौरान उनकी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और प्रस्तावित F-2 तैनाती जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
चीन ने उठाए जापान की रणनीतिक मंशा पर सवाल
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने F-2 की संभावित तैनाती को जापान की भारत के साथ सैन्य साझेदारी मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया है। चीनी विश्लेषकों का दावा है कि जापान अपनी रक्षा क्षमताओं का विस्तार कर रहा है और विदेशों में सैन्य सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के साउथ एशिया स्टडीज सेंटर के निदेशक लियू ज़ोंगयी ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में कहा कि जापान रक्षा निर्यात और विदेशी सैन्य सहयोग बढ़ाकर अपनी भूमिका को एक सामान्य सैन्य शक्ति के रूप में मजबूत करना चाहता है। वहीं भारत जापानी रक्षा तकनीक और औद्योगिक क्षमताओं तक पहुंच बढ़ाने में रुचि रखता है।
चीन ने भारत को दी अप्रत्यक्ष चेतावनी
चीनी रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि जापान प्रस्तावित सैन्य अभ्यास को चीन का मुकाबला करने की रणनीति के तौर पर पेश करता है, तो इससे भारत के जापान-चीन भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में खिंचने का जोखिम बढ़ सकता है।
हालांकि, चीन के इस आकलन के बावजूद भारत लंबे समय से अपनी रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देता रहा है। भारत और जापान दोनों क्वाड के सदस्य हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक समन्वय को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
बढ़ते रक्षा सहयोग का नया संकेत
F-2 विमानों की संभावित भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और जापान के बीच नियमित सैन्य अभ्यास, लॉजिस्टिक्स सहयोग और रक्षा औद्योगिक साझेदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जापानी लड़ाकू विमानों का भारत में अभ्यास दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, F-2 की भारत में तैनाती को लेकर अंतिम आधिकारिक निर्णय और अभ्यास का विस्तृत कार्यक्रम संबंधित सरकारों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
