नई दिल्ली। भारत का स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम **NavIC (Navigation with Indian Constellation)** फिलहाल सीमित क्षमता में काम कर रहा है। सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि वर्तमान में केवल तीन सक्रिय उपग्रह ही पोजिशनिंग सेवा देने की स्थिति में हैं, जबकि स्वतंत्र रूप से नेविगेशन सेवा संचालित करने के लिए कम से कम चार सक्रिय सैटेलाइट्स की आवश्यकता होती है।
सरकार के अनुसार, NavIC की लोकेशन आधारित सेवाएं फिलहाल प्रभावित हैं, हालांकि इसकी टाइमिंग सर्विस सामान्य रूप से काम कर रही है। पुराने उपग्रह **IRNSS-1F** का 10 वर्षीय मिशन पूरा होने के बाद अब केवल **IRNSS-1B**, **IRNSS-1I** और **NVS-01** सक्रिय हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इससे आम नागरिकों या भारतीय सशस्त्र बलों की नेविगेशन सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वर्तमान में NavIC का उपयोग अमेरिकी **GPS**, यूरोपीय **Galileo** और रूसी **GLONASS** जैसे वैश्विक नेविगेशन सिस्टम के साथ मिलकर किया जा रहा है। इसी मल्टी-सिस्टम व्यवस्था के जरिए आवश्यक सेवाएं जारी हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) NavIC नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए उपग्रहों की तैयारी में जुटा है। **NVS-03** उपग्रह लॉन्च के लिए तैयार है, जबकि **NVS-04** और **NVS-05** का विकास अंतिम चरण में है। पिछले वर्ष **NVS-02** में आई तकनीकी समस्या के बाद अब नए उपग्रहों के जरिए प्रणाली को पूरी क्षमता के साथ बहाल करने की योजना है।
NavIC भारत और उसकी सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सटीक लोकेशन और समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम है। इसके मजबूत होने से देश की रणनीतिक और नागरिक दोनों तरह की नेविगेशन सेवाएं और अधिक सशक्त होंगी।
