नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान राज्यसभा ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान को कानूनी संरक्षण मिलेगा। नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या उसके गायन में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान रखा गया है।
सरकार ने बताया राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा अहम कदम
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह संशोधन केवल कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत का सम्मान प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और यह कानून उसी भावना को मजबूत करेगा।
‘वंदे मातरम्’ को बताया आजादी के आंदोलन की प्रेरणा
भाजपा नेता विनोद तावड़े ने राज्यसभा से विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और देशभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस संशोधन के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा राष्ट्रीय गीत के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित होगी।
संसद में अन्य अहम विधेयकों पर भी रही चर्चा
राज्यसभा में यह विधेयक पारित होने से पहले लोकसभा ने एंटी पेपर लीक बिल को भी मंजूरी दी थी। संसद के दोनों सदनों में शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही।
कानून लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
संशोधित कानून लागू होने के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का जानबूझकर अपमान करने, उसके गायन में व्यवधान डालने या सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले मामलों में कानूनी कार्रवाई का स्पष्ट आधार उपलब्ध होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की गरिमा बनाए रखना और नागरिकों में उनके प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करना है।
