छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक नई पहल करते हुए कांकेर पैलेस में राज्य के विभिन्न जिलों से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स (इंफ्लुएंसर्स) और टूरिज्म बोर्ड की टीम की युवराज श्री जयप्रताप से सार्थक चर्चा आयोजित की।
बैठक में युवराज श्री जयप्रताप ने कांकेर रियासत के गौरवशाली इतिहास, राजमहल की स्थापत्य कला, स्थानीय संस्कृति और क्षेत्र की विशिष्ट परंपराओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कांकेर अपनी ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति के कारण पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है तथा विरासत स्थलों का संरक्षण और प्रभावी प्रचार पर्यटन विकास के लिए आवश्यक है।
चर्चा के दौरान कांकेर और आसपास के कम चर्चित पर्यटन स्थलों को डिजिटल माध्यमों से देश-विदेश तक पहुंचाने, उनकी विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और उन्हें पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के सुझाव दिए गए। साथ ही प्राकृतिक, धार्मिक, साहसिक और हेरिटेज टूरिज्म को एकीकृत रूप से विकसित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, जनजातीय जीवन, पारंपरिक कला, खान-पान और प्राकृतिक सौंदर्य को रचनात्मक वीडियो, फोटोग्राफी और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय समुदायों को भी आर्थिक लाभ होगा।
बैठक में हेरिटेज टूरिज्म के विकास, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी तथा पर्यटन आधारित रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। युवराज श्री जयप्रताप ने टूरिज्म बोर्ड की इस पहल की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए कांकेर और बस्तर की समृद्ध विरासत को नई पहचान मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड इन दिनों डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के साथ बस्तर पर्यटन परिचय यात्रा का आयोजन कर रहा है, जिसके माध्यम से बस्तर संभाग के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
