नई दिल्ली : भारत और जापान अपने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों देश ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिसमें आपसी व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर की जगह भारतीय रुपया और जापानी येन में सीधे भुगतान किया जा सकेगा।
अभी भारत और जापान के बीच व्यापारिक लेनदेन में पहले रुपये और येन को डॉलर में बदला जाता है, जिसके बाद भुगतान किया जाता है। इस प्रक्रिया में मुद्रा बदलने का अतिरिक्त खर्च आता है और डॉलर के उतार-चढ़ाव का असर भी पड़ता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद भारतीय कंपनियां सीधे रुपये में और जापानी कंपनियां सीधे येन में भुगतान कर सकेंगी। इससे कारोबारियों का खर्च कम होगा और लेनदेन प्रक्रिया तेज व आसान हो जाएगी।
इस प्रस्ताव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। इसके तहत दोनों देशों के बैंक ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकते हैं, जिससे रुपये और येन में सीधा व्यापार संभव हो सके।
योजना के अनुसार जापानी कंपनियों को भारत में विशेष बैंक खाते खोलने की सुविधा भी मिल सकती है, जिससे निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल डॉलर पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और जापान के बीच लगभग 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। ऐसे में रुपये-येन में सीधा लेनदेन शुरू होने से दोनों देशों के कारोबारियों को बड़ा लाभ मिल सकता है और भविष्य में व्यापार व निवेश में तेजी आने की संभावना है।
