पर्यावरण संरक्षण और वन संवर्धन की दिशा में छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला एक अनूठी पहल करने जा रहा है। जिले में “बीज गोला बनाबो-जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” महाअभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत 18 जून 2026 को जिले के विभिन्न स्थलों पर एक ही दिन में लगभग 2 लाख सीड बॉल (बीज गोले) तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह अभियान हरित जशपुर के निर्माण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राज्य के सबसे बड़े सामुदायिक प्रयासों में से एक माना जा रहा है। मानसून से पहले बड़े पैमाने पर सीड बॉल तैयार कर उन्हें वन क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में फैलाया जाएगा, जिससे हरियाली बढ़ाने में मदद मिलेगी।
क्या है सीड बॉल तकनीक?
सीड बॉल एक वैज्ञानिक और पारंपरिक तकनीक है, जिसमें बीजों को मिट्टी, खाद और पोषक तत्वों के मिश्रण से बने गोले में सुरक्षित रखा जाता है। इससे बीजों को कीटों और प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा मिलती है। बारिश की पहली फुहार के साथ ये बीज अंकुरित होकर पौधों में विकसित होने लगते हैं। यह तकनीक दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में पौधरोपण के लिए बेहद प्रभावी मानी जाती है।
इन स्थानों पर होगा आयोजन
अभियान के तहत जिले के कई प्रमुख स्थलों पर सीड बॉल निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें भैरव पहाड़, सोगड़ा (जशपुर), नुमान टेकरी, कुनकुरी शहरी क्षेत्र, ग्राम कुनकुरी और पत्थलगांव प्रमुख रूप से शामिल हैं।
जनभागीदारी बनेगी अभियान की ताकत
इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्कूली छात्र-छात्राओं, युवाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
“एक बीज, लाखों उम्मीदें”
अभियान की थीम “एक बीज, लाखों उम्मीदें” रखी गई है। इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण उपलब्ध कराना है। जिला प्रशासन और वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़कर जशपुर को हरियाली की नई पहचान दिलाने में योगदान दें।
यह महाअभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, बल्कि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी सशक्त माध्यम बनेगा।
