काठमांडू। नेपाल में हाल ही में हुए जेन-ज़ेड आंदोलन के बाद, पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। वह नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनेंगी और आज रात 8:45 बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगी। इस महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी नेपाल के मेयर बालेन शाह के समर्थकों ने दी।
इतिहास रचने वाली पहली महिला प्रधानमंत्री
नेपाल में संविधान के मुताबिक संसद को भंग करने और जेन-ज़ेड आंदोलन के प्रभाव से देश को एक नई दिशा में नेतृत्व मिला है। सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री पद संभालना न केवल नेपाल के लिए एक ऐतिहासिक पल है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक अहम कदम है। कार्की की नियुक्ति के साथ, नेपाल के इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ है।
गौरवमयी करियर और भारतीय संबंध
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं और उनकी छवि एक ईमानदार न्यायधीश के रूप में प्रसिद्ध रही है। उनका भारत से गहरा संबंध है, क्योंकि उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीतिक विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। 2017 में उन पर महाभियोग चलाया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें बहाल किया गया था।

मंत्रियों का शपथ ग्रहण
सुशीला कार्की के अलावा, नेपाल के जेन-ज़ेड समूह द्वारा समर्थित चार अन्य नेताओं को मंत्री पद की शपथ ली जा सकती है। इनमें कुलमान घीसिंग, ओम प्रकाश अर्याल, और बालानंद शर्मा का नाम प्रमुख है।
- कुलमान घीसिंग: वह नेपाल के प्रसिद्ध इंजीनियर हैं और उन्हें नेपाल में घर-घर बिजली पहुंचाने के लिए जाना जाता है।
- ओम प्रकाश अर्याल: वह एक प्रमुख नेपाली साहित्यकार हैं।
- बालानंद शर्मा: वे एक प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि, और शिक्षाविद हैं जिन्होंने नेपाली भाषा और साहित्य के विकास में योगदान दिया है।
कुलमान घीसिंग को मिला समर्थन
हालांकि, पहले कुलमान घीसिंग का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आया था, लेकिन पूर्ण समर्थन मिलने पर उनका नाम वापस ले लिया गया। अब उन्हें नेपाल के किसी बड़े मंत्रालय का जिम्मा सौंपा जा सकता है।

नेपाल का नया नेतृत्व
नेपाल की राजनीतिक दिशा में यह बदलाव एक नई शुरुआत का प्रतीक है, जो लोकतांत्रिक और समृद्ध नेपाल की ओर बढ़ते हुए दिखाई दे रहा है। जेन-ज़ेड आंदोलन और इस सरकार के गठन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि नेपाल में राजनीतिक स्थिरता और विकास की गति को तेज किया जाएगा।
