वन अपराधों की रोकथाम और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बस्तर वनमंडल द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष मॉकड्रिल आयोजित की गई। वन परिक्षेत्र भानपुरी के बनियागांव और पिपलावंड क्षेत्रों में आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य वन अमले की कार्यक्षमता, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना था।
मॉकड्रिल के दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने वन अपराधों से निपटने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। घटना की सूचना मिलने के बाद अमले को तत्काल अलर्ट करना, घटनास्थल तक शीघ्र पहुंचना और प्रभावी कार्रवाई करना जैसी व्यवस्थाओं को परखा गया। साथ ही संबंधित क्षेत्रों में सघन गश्त कर वन अपराधों के काल्पनिक मामलों का पंजीयन भी किया गया।
अभियान के दौरान वन अमले ने ग्रामीणों और ट्रैक्टर चालकों को वन संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्हें अवैध कटाई, अतिक्रमण और वनों को नुकसान पहुंचाने से होने वाले पर्यावरणीय एवं कानूनी दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने लोगों से वन संपदा की सुरक्षा में सहयोग करने की अपील भी की।
इस अवसर पर वनमंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कहा कि वन केवल प्राकृतिक संसाधनों का स्रोत नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वन और वन्यजीव एक-दूसरे के पूरक हैं तथा इनका संरक्षण मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है।
उन्होंने नागरिकों से वनों की सुरक्षा को अपनी सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए संरक्षण कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। मॉकड्रिल में उप वनमंडलाधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी, परिक्षेत्र सहायक, परिसर रक्षक और सुरक्षा श्रमिकों सहित वन विभाग का पूरा अमला शामिल रहा।
वन विभाग का मानना है कि इस तरह के नियमित अभ्यास से वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
