छत्तीसगढ़ शासन के ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश सिंह राणा ने जगदलपुर प्रवास के दौरान बस्तर संभाग में संचालित रेशम विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने रेशम विभाग की सिल्क समग्र योजना के तहत किए जा रहे कार्यों का जायजा लेते हुए अधिकारियों को लाभार्थी किसानों की आय बढ़ाने और उत्पादन क्षमता में सुधार के निर्देश दिए।
सोसनपाल गांव में प्रगतिशील रेशम कृषक शिबूराम के खेत और कृमिपालन इकाई का निरीक्षण करते हुए सचिव ने जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभाव का आकलन किया। किसान शिबूराम ने बताया कि उन्होंने उन्नत व्ही-1 प्रजाति के शहतूत पौधों का रोपण किया है तथा वर्तमान में 50 डिम्ब समूहों का कृमिपालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहतूत पौधरोपण, सिंचाई, कृमिपालन भवन निर्माण और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए शासन से आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है, जिससे अब तक उन्हें लगभग 55 हजार रुपये की आय हो चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि सिल्क समग्र योजना के अंतर्गत बस्तर जिले में अब तक 90 किसानों के खेतों में शहतूत पौधरोपण का कार्य पूरा किया जा चुका है। सचिव ने किसानों की आय का नियमित विश्लेषण करने और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इस दौरान सचिव ने बस्तर स्थित केंद्रीय रेशम बोर्ड के बुनियादी बीज प्रगुणन एवं प्रशिक्षण संस्थान का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से स्वस्थ डिम्ब समूह तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी ली और विभागीय मांग के अनुरूप समय पर डिम्ब समूह उपलब्ध कराने पर जोर दिया, ताकि रेशम उत्पादन में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
समीक्षा बैठक में रेशम धागाकरण गतिविधियों पर भी विशेष चर्चा हुई। सचिव ने सभी बंद या कम क्षमता से संचालित धागाकरण मशीनों को शीघ्र पूर्ण क्षमता के साथ चालू करने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
बैठक में कांकेर जिले की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए जिला रेशम अधिकारी श्रीमती वेणी कश्यप ने बताया कि झीपाटोला के धागाकरण समूहों ने अब तक 10 लाख 82 हजार 784 रुपये मूल्य का रेशम धागा तैयार कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है। सचिव ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए रेशम आधारित स्वरोजगार गतिविधियों को और विस्तार देने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि रेशम उत्पादन और धागाकरण गतिविधियों को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं, जिससे किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
