118 विधायकों का समर्थन साबित करने पर ही मिलेगा सरकार बनाने का न्योता
तमिलनाडु की राजनीति इस समय बड़े संवैधानिक और राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रही है। विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) और राजभवन के बीच सरकार गठन को लेकर खींचतान जारी है।
राजभवन सूत्रों के मुताबिक सरकार बनाने का निमंत्रण केवल उसी पक्ष को दिया जाएगा, जो विधानसभा में 118 विधायकों का समर्थन साबित कर सके। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है।
राज्यपाल पर दबाव के आरोपों से इनकार
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर किसी राजनीतिक या केंद्रीय दबाव में काम नहीं कर रहे हैं। उनके सभी फैसले संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताए गए हैं।
हालांकि, विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने में हो रही देरी को लेकर राज्यपाल की आलोचना भी तेज हो गई है।
TVK के पास फिलहाल 113 विधायकों का समर्थन
चुनाव में TVK ने DMK और AIADMK जैसे पारंपरिक दलों के लंबे प्रभुत्व को चुनौती देते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया।
सूत्रों के अनुसार TVK के पास वर्तमान में 108 विधायक हैं। हालांकि विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है, इसलिए प्रभावी संख्या 107 मानी जा रही है। पार्टी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे कुल संख्या 113 तक पहुंचती है।
इसके बावजूद बहुमत के लिए पार्टी को अभी भी 5 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है।
निर्दलीयों और छोटी पार्टियों पर टिकी नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्दलीय और छोटी पार्टियों के विधायकों का समर्थन जुटाने की है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य में त्रिशंकु विधानसभा जैसी स्थिति और “रिजॉर्ट पॉलिटिक्स” की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय आवश्यक बहुमत जुटाकर सरकार बना पाएंगे या तमिलनाडु में कोई नया राजनीतिक समीकरण उभरकर सामने आएगा।
