जल संरक्षण में सूरजपुर का ऐतिहासिक प्रदर्शन, देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान; 5,429 जल संरचनाओं से 94.89 लाख घन मीटर जल भराव क्षमता
रायपुर, 4 सितंबर 2026। जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में सूरजपुर ने देशभर में चौथा स्थान प्राप्त किया है। वहीं छत्तीसगढ़ में सूरजपुर को पहला स्थान मिला है। जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले के इस प्रदर्शन ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर मॉडल की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि किसान, ग्राम पंचायत, जल सखी और जल मित्रों की भागीदारी से इसे जनआंदोलन का रूप दिया गया है।
सूरजपुर में बनीं 5,429 जल संरचनाएं
सूरजपुर जिले में जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के लिए कुल 5,429 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें अमृत सरोवर, तालाब गहरीकरण, फार्म पॉन्ड, रिचार्ज पिट, कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम जैसी संरचनाएं शामिल हैं।
इन जल संरचनाओं की कुल जल भराव क्षमता 94.89 लाख घन मीटर है। जल संरक्षण के इन प्रयासों का सीधा असर जिले के सिंचित क्षेत्र पर भी पड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सिंचित रकबे में 5,608.26 हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।
जल संरचनाओं की हो रही जियो-टैगिंग
सूरजपुर जिले में निर्मित सभी जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग की जा रही है। इसके साथ ही इन संरचनाओं की नियमित समीक्षा भी की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य जल संरक्षण के कार्यों को स्थायी बनाना और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
जनभागीदारी से सफल हुआ सूरजपुर मॉडल
सूरजपुर की इस उपलब्धि में ग्रामीणों और किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कलेक्टर रेना जमील ने इस सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि जल संरक्षण प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जिले के ग्रामीणों और किसानों ने अपनी भूमि उपलब्ध कराने के साथ श्रमदान कर जल संरक्षण अभियान को मजबूती दी।
जिला पंचायत स्तर से भी गांव-गांव में जल सुरक्षा और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन – जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ के संदेश को धरातल पर उतारते हुए पंचायत स्तर पर जल संरक्षण की संरचनाओं को विकसित किया जा रहा है।
कृषि और ग्रामीण आजीविका को मिल रहा लाभ
जल संरक्षण के प्रयासों से सूरजपुर जिले में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है। सिंचित रकबा बढ़ने से कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका में प्रत्यक्ष सुधार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। जल संरचनाओं के निर्माण से बारिश के पानी को रोकने, भू-जल स्तर के पुनर्भरण और खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
सूरजपुर का जल संरक्षण मॉडल बना मिसाल
सूरजपुर की सफलता यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के साथ जनभागीदारी को जोड़कर जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। 5,429 जल संरचनाओं का निर्माण, 94.89 लाख घन मीटर जल भराव क्षमता और 5,608.26 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में वृद्धि जिले के जल संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान हासिल कर सूरजपुर ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। जिले का यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रभावी उदाहरण बन सकता है।
