आज की शिक्षा व्यवस्था लेखिका : डॉ. किरण बाला पटेल, भिलाई
आज के आधुनिक युग में शिक्षा व्यवस्था तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। नई शिक्षा नीति, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), ऑनलाइन शिक्षण तथा कौशल-आधारित शिक्षा ने शिक्षण के स्वरूप को व्यापक बनाया है। अब शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित हो रही है। फिर भी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। परीक्षा-केंद्रित अध्ययन, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, रोजगारोन्मुखी कौशल की कमी, नैतिक शिक्षा का ह्रास तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षिक असमानता आज भी चिंता का विषय हैं। अनेक विद्यार्थी अंकों की दौड़ में अपने वास्तविक ज्ञान, रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को पीछे छोड़ देते हैं। वर्तमान समय की आवश्यकता ऐसी शिक्षा व्यवस्था की है जो विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, नवाचार, अनुसंधान, मानवीय संवेदनाएँ, नैतिक मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वित विकास करे। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि प्रेरक, मार्गदर्शक और जीवन-निर्माता की भूमिका निभाएँ। साथ ही शिक्षा संस्थानों को उद्योग, समाज और अनुसंधान से जोड़कर विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना चाहिए। अंततः कहा जा सकता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जागरूक, संवेदनशील, आत्मनिर्भर और उत्तरदायी नागरिक का निर्माण करना है। जब हमारी शिक्षा व्यवस्था ज्ञान के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ मानवीय मूल्य तथा तकनीक के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का संतुलन स्थापित करेगी, तभी भारत वास्तव में “विश्वगुरु” बनने की दिशा में सशक्त कदम बढ़ाएगा।
शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों के विकास और राष्ट्र निर्माण का आधार : डॉ. किरण बाला पटेल
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