हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। लगातार बढ़ा हुआ बीपी दिल, किडनी, आंखों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। कई बार नियमित दवा लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं हो पाता। इसकी वजह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें भी हो सकती हैं। अधिक नमक खाना, शारीरिक गतिविधि की कमी, शराब का सेवन और दवाएं समय पर न लेना बीपी बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
दवा लेने के बावजूद क्यों बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर?
हाई बीपी के मरीजों को डॉक्टर नियमित दवा लेने, संतुलित खानपान अपनाने और रोजाना शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं। लेकिन कई लोग दवा लेने के बाद भी अपनी जीवनशैली पर ध्यान नहीं देते। ऐसे में ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर पर बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
इसके अलावा कुछ अन्य दवाओं का सेवन और घर पर बीपी जांचने का गलत तरीका भी रीडिंग को प्रभावित कर सकता है।
ज्यादा नमक खाना पड़ सकता है भारी
ब्लड प्रेशर बढ़ने की एक बड़ी वजह खाने में सोडियम की अधिक मात्रा है। कई लोग केवल ऊपर से डाले जाने वाले नमक को ही इसका कारण मानते हैं, जबकि पैकेज्ड फूड, नमकीन, अचार, पापड़, सॉस और तैयार खाद्य पदार्थों में भी काफी मात्रा में सोडियम मौजूद हो सकता है।
इसलिए हाई बीपी के मरीजों को खाने में नमक की मात्रा सीमित रखने के साथ पैकेट वाले खाद्य पदार्थों के लेबल भी जांचने चाहिए।
शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता वजन
लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम नहीं करना और वजन बढ़ना भी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में बाधा बन सकता है। इसके साथ ही अधिक शराब का सेवन भी रक्तचाप पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
नियमित पैदल चलना, व्यायाम करना और वजन नियंत्रित रखना बीपी को संभालने में मददगार हो सकता है। इसके लिए रोजमर्रा की दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करना भी उपयोगी है।
दवा लेने में लापरवाही न करें
हाई बीपी के मरीजों के लिए दवाओं का नियमित और निर्धारित समय पर सेवन करना बेहद जरूरी है। कई लोग बीपी की रीडिंग सामान्य आते ही दवा लेना बंद कर देते हैं या कभी-कभी दवा लेना भूल जाते हैं। इस तरह की लापरवाही से ब्लड प्रेशर दोबारा बढ़ सकता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करना या उसकी खुराक में बदलाव करना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए दवा को लेकर किसी भी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
दर्द निवारक दवाएं भी बढ़ा सकती हैं बीपी
कुछ दर्द निवारक दवाएं भी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती हैं। नेप्रोक्सेन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं के सेवन से कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ सकता है। इसके अलावा कुछ हार्मोनल दवाएं भी बीपी पर असर डाल सकती हैं।
इसलिए हाई बीपी के मरीजों को कोई भी नई दवा या सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
घर पर बीपी जांचते समय रखें ध्यान
कई बार ब्लड प्रेशर मापने के गलत तरीके से रीडिंग वास्तविक स्तर से अधिक या कम आ सकती है। बीपी जांचने से पहले कुछ मिनट आराम करें। कुर्सी पर पीठ टिकाकर बैठें और पैर जमीन पर सीधे रखें। हाथ को हृदय के स्तर पर रखकर सही आकार के कफ से रीडिंग लें। जांच के दौरान बात करने से बचें और जरूरत पड़ने पर कुछ मिनट के अंतराल पर दो रीडिंग लें।
हाई बीपी को नजरअंदाज करना हो सकता है खतरनाक
लगातार अनियंत्रित ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और किडनी को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए नियमित रूप से बीपी की जांच कराना, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श लें और उनकी सलाह के बिना दवा बंद न करें।
