अमेरिका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने चुनावी बयान को लेकर चर्चा में हैं। मिशिगन में अमेरिकी सीनेट चुनाव के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार डॉ. अब्दुल अल सैयद को निशाने पर लेते हुए ट्रंप ने उनके समर्थन में वोट करने वाले मतदाताओं पर विवादित टिप्पणी की। उन्होंने एक चुनावी रैली में कहा कि यदि कोई अश्वेत या यहूदी मतदाता अब्दुल अल सैयद को वोट देता है तो वह पागल है। ट्रंप ने रैली में मौजूद लोगों को भी इसी तरह संबोधित किया। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में चुनावी बयानबाजी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बीच मिशिगन की सीनेट सीट को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के बीच मुकाबला चर्चा में है। रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के समर्थन में दक्षिण कैरोलिना के रॉक हिल में आयोजित रैली में पहुंचे ट्रंप ने डॉ. अब्दुल अल सैयद पर निशाना साधा। इस दौरान उन्होंने उम्मीदवार के नाम को भी कथित तौर पर तोड़-मरोड़कर पेश किया और उन्हें ‘अब्दुल रमजान’ कहकर संबोधित किया।
धार्मिक पहचान को लेकर ट्रंप की टिप्पणी पर विवाद
ट्रंप ने अपने संबोधन में अश्वेत और यहूदी मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे अब्दुल अल सैयद को वोट देते हैं तो यह उनके लिए गलत फैसला होगा। उन्होंने इसके लिए ‘पागल’ शब्द का इस्तेमाल किया। ट्रंप की इस टिप्पणी को उम्मीदवार की धार्मिक और जातीय पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।
रैली के दौरान ट्रंप और उनके समर्थकों की ओर से अल सैयद को कम्युनिस्ट और जिहादी बताने वाले आरोप भी लगाए गए। इन आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। आलोचकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से चुनावी चर्चा नीतिगत मुद्दों के बजाय उम्मीदवार की पहचान पर केंद्रित हो सकती है।
अब्दुल अल सैयद ने महंगाई के मुद्दे पर दिया जवाब
ट्रंप की टिप्पणी पर डॉ. अब्दुल अल सैयद ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने व्यक्तिगत हमलों का जवाब अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को मुद्दा बनाकर दिया।
एक जनसभा में ट्रंप पर तंज कसते हुए अल सैयद ने कहा कि उनके नेतृत्व में खाने-पीने की चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि अगर ट्रंप लोगों से रमजान मनाने को कह दें तो उन्हें हैरानी नहीं होगी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि मौजूदा हालात में कोई रोजा रखने की वजह पूछे तो जवाब होगा कि खाने के लिए पैसे नहीं हैं।
अल सैयद ने कहा कि उनका नाम या उनका धर्म पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और मकानों के महंगे किराए की वजह नहीं है। उन्होंने इन समस्याओं के लिए रिपब्लिकन पार्टी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि आर्थिक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए पहचान आधारित राजनीति का सहारा लिया जा रहा है।
कौन हैं डॉ. अब्दुल अल सैयद?
डॉ. अब्दुल अल सैयद अमेरिकी राजनीति में उभरते हुए प्रगतिशील नेताओं में गिने जाते हैं। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1984 को मिशिगन के डेट्रॉयट में एक मिस्र-अमेरिकी परिवार में हुआ था। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद प्रतिष्ठित रोड्स स्कॉलरशिप हासिल की।
उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वह कोलंबिया यूनिवर्सिटी में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे।
साल 2015 में महज 30 वर्ष की उम्र में उन्हें डेट्रॉयट का स्वास्थ्य निदेशक नियुक्त किया गया था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने शहर की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, स्कूलों में सीसे के प्रदूषण से निपटने और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर काम किया।
मिशिगन की सीनेट सीट पर चुनावी बयानबाजी तेज
मिशिगन की सीनेट सीट को लेकर जारी राजनीतिक मुकाबले में ट्रंप की टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर ट्रंप ने अल सैयद की पहचान और उनके समर्थन में वोट करने वाले मतदाताओं को लेकर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर अल सैयद ने महंगाई, ईंधन की कीमतों और आवास खर्च जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर जवाब दिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी चुनावी राजनीति में धार्मिक पहचान, नस्लीय टिप्पणी और आर्थिक मुद्दों की भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।
