नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने देश को चीन से जोड़ने वाले प्रमुख उत्तरी व्यापारिक मार्ग को बड़ा झटका दिया है। रसुवागढ़ी-तिमुरे इलाके में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट कॉम्प्लेक्स और मैत्री पुल समेत कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए। इसके चलते नेपाल और चीन के बीच सड़क मार्ग से होने वाला व्यापार प्रभावित हुआ है।
बाढ़ से चीन जाने वाला अहम रास्ता हुआ बंद
अगस्त के अंत में आई बाढ़ और भूस्खलन से रसुवागढ़ी-तिमुरे क्रॉसिंग को भारी नुकसान पहुंचा। यह मार्ग नेपाल को चीन के तिब्बत क्षेत्र से जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों में शामिल है। बाढ़ में पुल, सड़कें, घर और आसपास के गांवों के साथ बिजली से जुड़े कई इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्रभावित हुए।
रसुवागढ़ी मार्ग के बंद होने से नेपाल के उत्तरी हिस्से का चीन के साथ जमीनी संपर्क फिलहाल गंभीर रूप से बाधित हुआ है। वहीं, कोदारी-झांगमू बॉर्डर पोस्ट भी 2015 के भूकंप के बाद से लंबे समय से बंद है।
भारत के रास्ते जारी है नेपाल का व्यापार
उत्तर की ओर चीन से जुड़ा मार्ग बाधित होने के बाद नेपाल के लिए भारत से जुड़े व्यापारिक रास्तों की अहमियत और बढ़ गई है। बीरगंज और विराटनगर जैसे भारतीय सीमा मार्गों के जरिए नेपाल को आवश्यक सामान, ईंधन, निर्माण सामग्री और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति जारी है।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल के कुल विदेशी व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब 64 प्रतिशत है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि चीन नेपाल के लिए आयात का एक प्रमुख स्रोत है।
चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर भी असर
नेपाल लंबे समय से चीन के साथ उत्तरी व्यापारिक गलियारे को विकसित कर भारत पर अपनी निर्भरता कम करने के विकल्प के तौर पर देखता रहा है। हालांकि, बाढ़ से उत्तरी सीमा के इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान ने इस व्यवस्था की भौगोलिक और प्राकृतिक चुनौतियों को सामने ला दिया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में लंबा समय लग सकता है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि नेपाल चीन के साथ व्यापार या चीनी निवेश से पूरी तरह दूरी बना लेगा। भविष्य में उत्तरी व्यापारिक गलियारे को दोबारा सक्रिय करने के प्रयास जारी रहने की संभावना है।
पुनर्निर्माण के लिए भी भारत की अहम भूमिका
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्निर्माण के लिए ईंधन, मशीनरी, निर्माण सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं की जरूरत होगी। ऐसे में भारत से जुड़े सड़क और बंदरगाह नेटवर्क नेपाल के लिए महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्ग बने हुए हैं।
इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर यह दिखाया है कि नेपाल की भौगोलिक स्थिति और भारत के साथ उसके मौजूदा व्यापारिक संपर्क उसके लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। साथ ही, चीन से वैकल्पिक संपर्क विकसित करने की उसकी दीर्घकालिक योजना के सामने हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक और इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी चुनौतियां भी स्पष्ट हुई हैं।
