सुबह से शाम तक घर, ऑफिस या किसी बंद जगह में रहने और पर्याप्त धूप न मिलने से शरीर में विटामिन D की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी के लक्षण कई बार सामान्य होते हैं, इसलिए लोग इन्हें थकान, तनाव या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
विटामिन D की कमी के प्रमुख लक्षण
विटामिन D की कमी होने पर कुछ लोगों में लगातार थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी, हड्डियों में दर्द और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य शारीरिक गतिविधियां करने में मांसपेशियों की कमजोरी महसूस होना भी इसका एक संकेत हो सकता है।
कुछ मामलों में बार-बार बीमार पड़ने की शिकायत भी हो सकती है। हालांकि, ये लक्षण केवल विटामिन D की कमी के कारण ही हों, यह जरूरी नहीं है। लगातार समस्या रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ सकता है असर
विटामिन D शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लंबे समय तक या गंभीर कमी रहने पर हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है। वयस्कों में कमजोरी और हड्डियों में दर्द की समस्या हो सकती है, जबकि बच्चों में गंभीर कमी होने पर हड्डियों के विकास पर असर पड़ सकता है।
विटामिन D की स्थिति मांसपेशियों की ताकत से भी जुड़ी होती है। खासकर उम्रदराज लोगों में कमजोरी और गिरने के जोखिम के संदर्भ में पर्याप्त विटामिन D महत्वपूर्ण माना जाता है।
किन लोगों में ज्यादा हो सकता है खतरा?
जो लोग ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं और धूप के संपर्क में कम आते हैं, उनमें विटामिन D की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा विटामिन D के अवशोषण को प्रभावित करने वाली कुछ स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों में भी इसकी कमी हो सकती है।
खाने में शामिल करें ये चीजें
विटामिन D के कुछ खाद्य स्रोतों में अंडे की जर्दी, वसायुक्त मछली और विटामिन D से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ शामिल हैं। हालांकि, केवल भोजन से पर्याप्त मात्रा में विटामिन D मिलना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता।
अगर जांच में विटामिन D की कमी सामने आती है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट या दवा ली जा सकती है। बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक या अधिक मात्रा में विटामिन D सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
कब करानी चाहिए जांच?
अगर लंबे समय से थकान, कमजोरी, हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्या बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। विटामिन D की जांच, सप्लीमेंट की मात्रा या उपचार शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
