एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल नीति से उन्हें कोई निजी या आर्थिक लाभ नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
गडकरी ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग केवल 1.5 प्रतिशत थी, जो अब 20 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंच गई है। उनके अनुसार इस कार्यक्रम के कारण देश ने करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत की है और आयातित ईंधन पर निर्भरता भी घटी है।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग में वृद्धि हुई है, जिससे किसानों को लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का लाभ मिला है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिली है।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों के खराब होने के आरोपों पर गडकरी ने कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि एथेनॉल के कारण वाहन खराब होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ऐसे दावों के समर्थन में प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत हर वर्ष 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में एथेनॉल सहित वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधनों का उपयोग बढ़ने से आयात बिल कम होगा, प्रदूषण घटेगा और देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार एथेनॉल के साथ-साथ बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ईंधनों को भी प्रोत्साहित कर रही है।
