भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 29 जून से 6 जुलाई तक आयोजित सहकारिता सप्ताह का समापन कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम, कवर्धा में जिला स्तरीय कृषक संगोष्ठी के साथ हुआ। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर राजनांदगांव लोकसभा सांसद श्री संतोष पाण्डेय और पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा भी उपस्थित रहीं।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सहकारिता सप्ताह का समापन किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि नए संकल्प और नई शुरुआत का अवसर है। उन्होंने कहा कि सहकारिता को केवल धान खरीदी और बैंकिंग तक सीमित न रखकर कोल्ड स्टोरेज, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन, गैस एजेंसी संचालन और अन्य रोजगारमूलक गतिविधियों तक विस्तार देने की जरूरत है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने बताया कि कबीरधाम जिले में पहले 90 सहकारी समितियां थीं, लेकिन 40 नई समितियों के गठन के बाद इनकी संख्या बढ़कर 138 हो गई है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना का उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करना तथा समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में सहकारिता की भावना स्वाभाविक रूप से मौजूद है। उन्होंने बस्तर की सामुदायिक कार्य संस्कृति और कबीरधाम के शक्कर कारखाने का उदाहरण देते हुए कहा कि सहकारिता मॉडल ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बन सकता है। गुजरात के बनासकांठा मॉडल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां दुग्ध उत्पादन के साथ मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर लाभांश सीधे सदस्यों में बांटा जाता है। उन्होंने किसानों से सहकारिता को जनआंदोलन बनाकर नए क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
राजनांदगांव सांसद संतोष पाण्डेय ने कहा कि सहकारिता का अर्थ है साथ मिलकर कार्य करना और एक-दूसरे का सहयोग करना। उन्होंने कहा कि भारतीय गांवों में यह परंपरा सदियों से रही है और सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद इस क्षेत्र को नई दिशा और गति मिली है।
पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा किसानों की मेहनत और समर्पण ने बनाया है। सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद इस क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आया है और यह जनभागीदारी का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
कार्यक्रम में आठ किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण और मत्स्य पालन के लिए मछली कीट वितरित किए गए। साथ ही निबंध, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली 15 बालिकाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, किसानों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही।
