West Asia Crisis: नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठकें कीं। प्रधानमंत्री आवास पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैक-टू-बैक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में युद्ध के कारण उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का गहन विश्लेषण किया गया।
CCS बैठक: सुरक्षा पर फोकस
CCS की बैठक में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और भारत पर उनके संभावित सुरक्षा प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर बदलती परिस्थिति पर नजर रखें और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखें।
भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक में खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए एयरस्पेस, वैकल्पिक रूट और नौसेना-वायुसेना की तैयारियों पर गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने किसी भी इमरजेंसी के लिए त्वरित कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए।
CCEA बैठक: आर्थिक प्रभाव पर मंथन
CCS बैठक के तुरंत बाद आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक हुई। इसमें कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा समेत कई मंत्री शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर का आकलन करना था।
सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि पश्चिम एशिया की अस्थिरता के बावजूद देश में ईंधन, खाद और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू बनी रहे। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में किसी भी व्यवधान से निपटने के लिए पहले से तैयार रहें।
वैश्विक चिंता और भारत की तैयारियां
पश्चिम एशिया का क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ईरान-इजरायल तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है। भारत सरकार सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाते हुए हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारी बैठक में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे। विदेश मंत्रालय लगातार विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के संपर्क में है ताकि हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
