पंडित महेन्द्र उपाध्याय । ब्रह्महत्या का अर्थ केवल ब्राह्मण-हत्या या गौ-हत्या तक सीमित नहीं है। शास्त्रों में यह भी माना गया है कि अबोध शिशु अथवा गर्भ में पल रहे जीवन का नाश करना भी ब्रह्महत्या के समान ही पाप है, क्योंकि अबोध बालक-बालिका में स्वयं ईश्वर का वास माना गया है।
इसलिए हमें ऐसे किसी भी कर्म से सदैव बचना चाहिए, जिसके कारण भविष्य में पश्चाताप करना पड़े।
पंडित महेन्द्र उपाध्याय द्वारा – जरूर पढ़ें क्लिक करे 👉 ग्रंथों में वर्णित सामाजिक चेतावनी : अयोग्य का सम्मान और योग्य का अपमान बनता है संकट का कारण
यह बात मैं किसी विशेष व्यक्ति को लक्ष्य करके नहीं कह रहा हूँ, बल्कि केवल सामान्य जनहित एवं जानकारी के उद्देश्य से साझा कर रहा हूँ, क्योंकि वर्तमान समय में इस विषय से जुड़ी कई चिंताजनक प्रवृत्तियाँ देखने को मिल रही हैं।
यदि किसी को यह बात अनुचित या कठोर लगी हो, तो कृपया क्षमा करें। यह संदेश किसी के लिए व्यक्तिगत नहीं, बल्कि केवल जागरूकता और सद्भावना हेतु है।
