Utpanna Ekadashi 2025: नई दिल्ली। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी इस बार 15 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। यही वह पवित्र तिथि है जब भगवान विष्णु के शरीर से दिव्य कन्या देवी एकादशी प्रकट हुईं और राक्षस मुर का वध किया। भगवान ने उन्हें वरदान दिया कि इस दिन व्रत करने वाले को सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त होगा। यही कारण है कि उत्पन्ना एकादशी को साल की पहली और सबसे खास एकादशी माना जाता है। लेकिन इस व्रत का पूरा फल तभी मिलेगा जब आप 8 बड़ी गलतियां करने से बचें, वरना घर में दुर्भाग्य आ सकता है।
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कब है उत्पन्ना एकादशी?
वैदिक पंचांग के अनुसार:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 15 नवंबर रात 12:49 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 16 नवंबर रात 02:37 बजे
- व्रत और पूजा: 15 नवंबर (पूर्ण दिन)
ये 8 गलतियां भूलकर भी न करें
- चावल, जौ, दालें बिल्कुल न खाएं चावल खाने से पाप लगता है, व्रत भंग हो जाता है।
- लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा से दूर रहें तामसिक भोजन व्रत का फल नष्ट कर देता है।
- क्रोध, ईर्ष्या, निंदा न करें मन में वैर-विरोध रखने से व्रत बेकार। सात्विक व्यवहार जरूरी।
- तुलसी दल नहीं तोड़ें इस दिन तुलसी तोड़ना महापाप माना गया है।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें काम-वासना से दूर रहें, वरना व्रत अधूरा।
- किसी की बुराई न करें चुगली करने से पुण्य नष्ट हो जाता है।
- झूठ न बोलें सत्य बोलें, अन्यथा व्रत का लाभ शून्य।
- दूसरों को कष्ट न दें किसी को दुख पहुंचाने से घर में दुर्भाग्य आता है।
क्या करें?
- सुबह स्नान कर विष्णु जी की पूजा करें।
- तुलसी पूजन और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जपें।
- फलाहार करें, शहद, दूध, फल लें।
- शाम को दीपदान करें।
फल
- सभी पाप नष्ट
- मोक्ष प्राप्ति
- घर में सुख-समृद्धि
- मुर दैत्य जैसी बाधाएं दूर
उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि
- एकादशी से एक दिन पहले दशमी तिथि की रात में सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
- भगवान विष्णु के समक्ष हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
- उन्हें रोली, चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें।
- ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद एकादशी की व्रत कथा पढ़ें और अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
- इस दिन केवल फलाहार ही करना चाहिए।
- इस दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
- अगर हो पाए, तो रात के समय भगवान का भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन, यानी 16 नवंबर को द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें।
- इसके बाद व्रत का पारण करें।
- पारण हमेशा हरि वासर यानी द्वादशी तिथि को करना चाहिए।
पूजा मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:।।
- शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
- लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्। वन्दे विष्णुम् भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
इस उत्पन्ना एकादशी को पूरी श्रद्धा से मनाएं, गलतियां न करें। 15 नवंबर को भगवान विष्णु और देवी एकादशी का आशीर्वाद लें।
